देहरादून। देहरादून नगर निगम चुनाव में महापौर पद पर बंपर वोटों से जीतकर आए सुनील उनियाल गामा का सफर चुनौतियों से भरा होगा। दून के नए महापौर के रूप में गामा पर एक-तरफ पुराने शहर के विकास का दारोमदार रहेगा, तो दूसरी तरफ जो हिस्सा गांव से अलग होकर निगम से जुड़ा है, उसके विकास की शुरुआत उन्हें शून्य से करनी होगी। क्योंकि यह भाग शहर का रूप तो ले चुका है, मगर शहर के अनुरूप यहां सुविधाओं का अभाव है।
गामा के लिए यह चुनौतियां इसलिए भी बड़ी हैं, क्योंकि महापौर के रूप में उनका यह पहला अनुभव है। इससे पहले भी उन्होंने संस्थागत रूप से किसी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है। उनके लिए सिर्फ राहत की इतनी बात जरूर है कि नगर निगम के नए बोर्ड में भाजपा पार्षदों का दबदबा रहेगा और किसी भी प्रस्ताव को बिना अड़चन पास किया जा सकेगा।
हालांकि प्रस्ताव के चरण तक पहुंचने के लिए निकट भविष्य के महापौर सुनील उनियाल गामा को न सिर्फ निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को जल्द आत्मसात करना होगा, बल्कि उसका बखूबी प्रयोग करने में भी दक्षता हासिल करनी होगी।


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