हरिद्वार। केंद्रीय पेयजल मंत्री उमा भारती ने कहा कि राम जन्मभूमि पर मंदिर ही बनेगा कुछ और नहीं यह तय है। ठीक इसी तरह गंगा स्वच्छ, निर्मल और अविरल होगी, यह भी तय है। गंगा को लेकर किसी की नीयत में जरा भी खोट नहीं है। यह सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्ति देश को मिला है, जो गंगा की चिंता में दिन-रात चिंतन और उसको अविरल बनाने की योजनाओं को गंभीरता से क्रियान्वित करा रहे हैं। गंगा स्वच्छता की दिशा में अब लोगों को मन से जुड़कर इसे निर्मल और अविरल रखने का संकल्प पूरा करने का दिन आ गया है।

ऋषिकुल ग्राउंड में चल रहे देवभूमि स्वदेशी मेले के दूसरे दिन केंद्रीय पेयजल मंत्री ने कहा कि हमने गंगा स्वच्छता और संरक्षण के लिए बीस हजार करोड़ का प्लान बनाया है, जिसे सरकार ने मंजूर कर दिया है। गंगा किनारे बसे गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। अब लोगों को इसमें नाले-नालियों का कचरा व गंदा पानी नहीं डालने के लिए जागरूक करने के लिए जनजागरण किया जाएगा। गंगा में तर्पण करने वाले गंगा की अविरलता के लिए पहले सोचें।

केंद्र सरकार के प्रयास से गंगा स्वच्छता आज मिशन बन गया है। अब दूसरे चरण में गंगा किनारे 25 पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की योजना चल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दस सबसे गंदी नदियों में गंगा है और इसमें सबसे अधिक स्ट्रेच कानपुर है। उमा भारती ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार इस दिशा में गंभीरता से बढ़ रही है। गंगा पर बांध बने, लेकिन उसकी एक भी धारा को रोकें नहीं। गंगा को खराब करने वालों के लिए गंगा एक्ट जरूरी है। उन्होंने कहा कि  महामना मालवीय ने यहां पर प्रवाह को रोकने पर आंदोलन छेड़ा तब जाकर हरकी पैड़ी पर गंगा का अविरल प्रवाह रखने का समझौता अंग्रेजों के साथ हुआ।

व्यर्थ नहीं जाएगा प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का बलिदान

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने गंगा रक्षा के लिए तप कर अपने प्राण त्यागने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद को पिता तुल्य बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद और अशोक सिंघल की आत्मा आज भी गंगा के साथ जुड़ी है। मैं गंगा को स्वच्छ कराकर ही भविष्य में उनसे मिलूंगी। उन्होंने कहा कि 2014 में हरिद्वार से मुझे लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए निर्विरोध सभी ने आमंत्रित किया।

मगर पार्टी ने झांसी से लड़ने का निर्देश दिया। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। कहा स्वामी सानंद गंगा के लिए जब उपवास कर रहे थे तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कहने पर उनसे मिलने शिवत्रयोदशी के दिन आई थी। उस दिन गंगा को लेकर कई भाव देखे। उस दिन एनजीटी की ओर से एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कहा गंगा पीने नहीं नहाने लायक भी नहीं है। दूसरा रूप देखा कि स्वामी सानंद गंगा को मां मानकर तप कर रहे थे। एक तरफ कांवड़ि‍यों की आस्था तो एक तरफ पर्यावरणविदों की राय। सभी को मिलाकर चलने से ही गंगा का संरक्षण होगा।

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