वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने आगामी वित्तीय वर्ष में टैक्स से 2719 करोड़ ज्यादा कमाई का लक्ष्य रखा है. पिछले वित्तीय वर्ष में टैक्स से कमाई का लक्ष्य 20,535 करोड़ रुपये था तो इस साल 23254 करोड़ कमाई का लक्ष्य सरकार ने रखा है. इसमें राज्य और केंद्र दोनों से मिलने वाले करों से आमदनी शामिल है.
2018-19 के त्रिवेन्द्र सरकार के बजट में पांच सबसे बड़े आवंटन, सैलरी, पेंशन, नियोजन को छोड़ दें तो शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा 7701 करोड़ रुपये का बजट मिला है. दूसरे स्थान पर 2292 करोड़ रुपये के साथ ग्राम्य विकास है.
2 हजार 286 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ स्वास्थ्य विभाग तीसरे नंबर पर है तो चौथे स्थान पर PWD है जिसे सरकार ने 2 हजार 53 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. पांचवें स्थान पर एक हज़ार, 668 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ राजस्व और सामान्य प्रशासन है.
पुलिस और जेल को 1935 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं तो स्वास्थ्य को 2286 करोड़ रुपये, शिक्षा को 7701 करोड़ रुपये, पीडब्ल्यूडी को 2053 करोड़ रुपये, उद्योग को 307 करोड़ रुपये, पर्यटन को 183 करोड़ रुपये, कृषि को 966 करोड़ रुपये, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण को 920 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
विधानसभा के बजट पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 73 फीसदी बढ़ाया गया है. इस वित्तीय वर्ष में विधानसभा को 85 करोड़ का बजट दिया गया है जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में महज 45 करोड़ का बजट था.
आबकारी विभाग को 26 करोड़ रुपये, वित्त और सचिवालय, अन्य सेवाओं को 16,569 करोड़ रुपये, समाज कल्याण को 1666 करोड़ रुपये, श्रम विभाग को 354 करोड़ रुपये, ग्राम्य विकास को 2292 करोड़ रुपये, पेयजल, आवास और शहरी विकास को 1636 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है.
ऊर्जा विभाग को 319 करोड़ रुपये, वन विभाग को 808 करोड़ रुपये, उद्यान विभाग को 311 करोड़ रुपये, खाद्य विभाग को 275 करोड़ रुपये, परिवहन विभाग को 273 करोड़ का बजट दिया गया है.
परिवहन विभाग को रिकॉर्ड तोड़ बजट आवंटित हुआ है. सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 273 करोड़ का बजट दिया है. नई गाड़ियों की खरीद, बस अड्डों के निर्माण को लेकर बंपर वृद्धि की गई है. पिछले साल बजट था 83 करोड़ रुपये, इस बार 273 करोड़ रुपये है.
श्रम विभाग के बजट में 75 फीसदी की वृद्धि की गई है, विधानसभा के बजट में 70 फीसदी से ज़्यादा की वृद्धि है, वन विभाग के बजट में मामूली 17 फीसदी की वृद्धि, शिक्षा विभाग के बजट में मामूली 16 फीसदी की बढ़ोतरी, पर्यटन विभाग के बजट में 65 फीसदी की बढ़ोतरी है. सूचना विभाग का बजट लगभग दोगुना किया गया है.
सबसे ज्यादा वेतन, भत्ते, पेंशन, मज़दूरी में राज्य का पैसा खर्च हो रहा है. चारों मदों में लगभग आधा बजट हो रहा है. 13 फीसदी के साथ निर्माण कार्यों में होने वाला ख़र्च दूसरे स्थान पर है और ब्याज के रूप में राज्य के कुल बजट का 11 फ़ीसदी जा रहा है.
राज्य पर कर्ज़ का भार और बढ़ सकता है. पिछले बजट को पूरा करने में ही बड़ा कर्ज़ लेना पड़ा था. इस बार 14 फीसदी की वृद्धि वाले बजट के लिए पैसे की होगी मारा-मारी. ज्यादा कर्ज़ लेकर ही बजट को पूरा करने का बढ़ेगा दबाव. राज्य के अपने संसाधनों से आमदनी की तुलना में खर्च कहीं अधिक है.


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