बेलारूस, लाओत्सु, भूटान और पाकिस्तान के योग साधकों ने अन्तिम दिन किया सहभाग
परमार्थ निकेतन अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की समापन बेला में 101 देशों का प्रतिनिधित्व
अनेक उपलब्धियों, विलक्षणताओं एवं यादगार क्षणों को समेटे योग महोत्सव जिसका शुभारम्भ तालवादक शिवमणि के ढोल से हुआ और कैलास खेर के कैलासा बैंड की थाप पर हुआ समापन
ऋषिकेश, 9 मार्च। परमार्थ निकेतन अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की समापन बेला में विश्व के 101 देशों के योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया। योग जिज्ञासुओं ने योग, आसन, प्राणायाम के साथ-साथ पूज्य संतों के उद्बोधनों के माध्यम से हिन्दुधर्म, भारतीय संस्कृति, संस्कार को भी परमार्थ निकेतन में रहकर आत्मसात किया।
प्रस्थान के समय योग साधकों को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने रूद्राक्ष की माला, अंगवस्त्र एवं योग प्रमाण-पत्र देकर सभी का अभिनन्दन किया।
स्वामी जी महाराज और साध्वी जी सान्निध्य में सभी योग साधकों ने संकल्प किया कि अपने-अपने देश जाकर भारतीय संस्कृति, विश्व बन्धुत्व, वसुधैव कुटुम्बकम और संस्कारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। साथ ही अहिंसा, शाकाहार, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करेंगे।
सभी योग साधकों ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हो इस भावना से वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। पूज्य स्वामी जी ने 101 देशों से आये योग राजदूतों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और योग के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ते रहने का आशीर्वाद देकर विदा किया।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अन्तिम दिन बेलारूस, लाओत्सु, भूटान और पाकिस्तान के योग साधकों ने सहभाग किया। साथ ही थाईलैण्ड से 20 योग साधिकाओं के दल ने भी अन्तिम दिन योग महोत्सव में सहभाग किया।
50 से 60 योग साधकों के अलावा आज सभी ने परमार्थ निकेतन से विदाई ली। साधकों ने कहा कि साध्वी भगवती सरस्वती जी हमें भगिनी निवेदिता की याद दिलाती है। उनकी सादगी, भारतीय अध्यात्म की गूढ़ जानकारी, संस्कार और भारतीय संस्कारों से युक्त जीवन सभी का मागदर्शन करता है वे हमारी प्रेरणास्रोत है। वर्ष 2018 में साध्वी जी द्वारा लिखित ’’सत्संग’’ पुस्तक का लोकार्पण एवं ’’पीस’’ का चीन की भाषा में अनुवाद भी अनुपम उपलब्धि रही।
परमार्थ निकेतन अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की समापन बेला में 101 देशों का प्रतिनिधित्व
अनेक उपलब्धियों, विलक्षणताओं एवं यादगार क्षणों को समेटे योग महोत्सव जिसका शुभारम्भ तालवादक शिवमणि के ढोल से हुआ और कैलास खेर के कैलासा बैंड की थाप पर हुआ समापन
ऋषिकेश, 9 मार्च। परमार्थ निकेतन अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की समापन बेला में विश्व के 101 देशों के योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया। योग जिज्ञासुओं ने योग, आसन, प्राणायाम के साथ-साथ पूज्य संतों के उद्बोधनों के माध्यम से हिन्दुधर्म, भारतीय संस्कृति, संस्कार को भी परमार्थ निकेतन में रहकर आत्मसात किया।
प्रस्थान के समय योग साधकों को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने रूद्राक्ष की माला, अंगवस्त्र एवं योग प्रमाण-पत्र देकर सभी का अभिनन्दन किया।
स्वामी जी महाराज और साध्वी जी सान्निध्य में सभी योग साधकों ने संकल्प किया कि अपने-अपने देश जाकर भारतीय संस्कृति, विश्व बन्धुत्व, वसुधैव कुटुम्बकम और संस्कारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। साथ ही अहिंसा, शाकाहार, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करेंगे।
सभी योग साधकों ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हो इस भावना से वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। पूज्य स्वामी जी ने 101 देशों से आये योग राजदूतों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और योग के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ते रहने का आशीर्वाद देकर विदा किया।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अन्तिम दिन बेलारूस, लाओत्सु, भूटान और पाकिस्तान के योग साधकों ने सहभाग किया। साथ ही थाईलैण्ड से 20 योग साधिकाओं के दल ने भी अन्तिम दिन योग महोत्सव में सहभाग किया।
50 से 60 योग साधकों के अलावा आज सभी ने परमार्थ निकेतन से विदाई ली। साधकों ने कहा कि साध्वी भगवती सरस्वती जी हमें भगिनी निवेदिता की याद दिलाती है। उनकी सादगी, भारतीय अध्यात्म की गूढ़ जानकारी, संस्कार और भारतीय संस्कारों से युक्त जीवन सभी का मागदर्शन करता है वे हमारी प्रेरणास्रोत है। वर्ष 2018 में साध्वी जी द्वारा लिखित ’’सत्संग’’ पुस्तक का लोकार्पण एवं ’’पीस’’ का चीन की भाषा में अनुवाद भी अनुपम उपलब्धि रही।

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