भ्रष्टाचार के विरोध, भ्रष्टचार की कमर तोड़ने की बातें उत्तराखंड जुमलेबाज़ी ज़्यादा नज़र आती हैं. ज्यादातर मंत्रियो और विधायकों ने तो सम्पत्ति का ब्यौरा नहीं दिया तो अधिकारी क्यों पीछे रहें. आरटीआई से मिली जानकरी के मुताबिक राज्य के 101 पीसीएस अधिकारियों ने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है.
उत्तराखंड सरकार के पारदर्शिता और ज़ीरो टॉलरेंस के दावे आकड़ों की ज़मीन पर हवा हो रहे हैं. कोई नई पहल करना तो दूर राज्य सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए पहले से लागू नियमों का ही पालन नहीं करा पा रही है.
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के अधिकतर पीसीएस अधिकारियों ने अपना सम्पत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है. काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने अधिकारियों के सम्पत्ति विवरण सम्बन्धी सूचना मांगी थी. उन्हें बताया गया कि राज्य के अधिकतर PCS अधिकारियों द्वारा वार्षिक सम्पत्ति का ब्यौरा न देने का चैंकाने वाला खुलासा हुआ है.
आरटीआई के अनुसार सिर्फ़ 30 PCS अधिकारियों ने ही अपनी सम्पत्ति का विवरण दिया है. 101 PCS अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने 28 मार्च, 2018 तक अपना सम्पत्ति विवरण नहीं दिया था. सम्पत्ति का ब्यौरा न देने वालों में वह अधिकारी भी शामिल हैं जिनका नाम एनएच 74 घोटाले है.
वरिष्ठ पत्रकार एसएमए काज़मी कहते हैं कि अगर सारे अधिकारी और विधायक अपनी सम्पति का ब्यौरा समय पर दे देंगे तो इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी.
भाजपा के देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी कहते हैं जब सरकार का नियम है कि सम्पति का ब्यौरा समय पर दें तो सभी को सम्पति का ब्यौरा दे देना चाहिए. मंत्रियों और विधायकों के साथ ही सरकारी अधिकारियों को भी अपनी सम्पति का ब्यौरा दे देना चाहिए.


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