देहरादून: राष्ट्रीय नदी गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के उद्देश्य से चल रही नमामि गंगे परियोजना के तहत उत्तरकाशी से हरिद्वार तक गंगा में गिरने वाले वाले टैप किए नालों की जांच की जाएगी। प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री प्रकाश पंत ने निदेशक नमामि गंगे को टैप नालों के साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की अद्यतन स्थिति को लेकर आख्या सहित पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र सरकार की महत्वाकाक्षी नमामि गंगे परियोजना के तहत उत्तराखंड में भी गंगा स्वच्छता के मद्देनजर तमाम कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसमें मुख्य फोकस गंगा में गिर रहे नालों को टैप करने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाट पर है। इनमें कुछ कार्य पूर्ण होने तो कुछ में कार्य प्रगति पर होने का दावा है।
इसी कड़ी में नमामि गंगे परियोजना में गंगा से लगे शहरों उत्तरकाशी, देवप्रयाग, ऋषिकेश और हरिद्वार में हुए कायरे की पड़ताल करते हुए सीरीज प्रकाशित की। इसमें सरकारी आकडों और जमीनी हकीकत में काफी अंतर नजर आया।
विभिन्न स्थानों पर नाले टैप दर्शाये गए, मगर हकीकत में ये ठीक से टैप नहीं हुए हैं। टैप किए गए तमाम नालों की गंदगी अभी भी गंगा में गिर रही है। यही नहीं, एसटीपी से संबंधित कार्यों की रफ्तार भी बेहद सुस्त है। ये सब सिस्टम की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
प्रकाशित खबरों का पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री प्रकाश पंत ने संज्ञान लेते हुए निदेशक नमामि गंगे को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी बिंदुओं के साथ ही खबरों में उठाए गए बिंदुओं पर आख्या सहित पत्रावली प्रस्तुत करने के लिए निदेशक से कहा है। काबीना मंत्री पंत ने कहा कि गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के मद्देनजर चल रहे कार्यों में किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं की जाएगी।


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