उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की चुनौती से पार पाने के लिए भाजपा में माथापच्ची शुरू हो गई है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद विस्तारकों, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री और सह प्रभारियों के साथ मैराथन बैठक की। इसमें पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी के साथ आए गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित वोटों को हर हाल में सहेजने के निर्देश दिए गए। सपा-बसपा के गठजोड़ के ओबीसी-दलित गठबंधन के रूप में धारणा न बने, इससे बचने के लिए पार्टी ने इसे यादव-जाटव गठबंधन के रूप में प्रचारित करने की भी रणनीति बनाई है। शाह ने विस्तारकों से हर हाल में 50 फीसदी मत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंकने का भी निर्देश दिया है। बैठक में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की प्रचंड जीत का कारण मूल समर्थक मतदाता वर्ग (अगड़ा) के साथ गैर यादव ओबीसी के बड़े तो गैर जाटव दलित के छोटे तबके का पार्टी के साथ जुड़ना था। शाह की रणनीति के मुताबिक, सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण से अगड़ा वर्ग पार्टी के साथ पहले से जुड़ा हुआ है।
खास बातें
- सपा-बसपा के साथ आने को यादव-जाटव गठबंधन के रूप में प्रचारित करने की बनी योजना
- पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने विस्तारकों के साथ की बैठक, मांगे हर हाल में 50 फीसदी वोट
- सपा-बसपा गठबंधन के बाद एनडीए का कुनबा बिखरने का संदेश नहीं देना चाहती पार्टी
चिंता इस बात की है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद बीते दो चुनाव में पार्टी के पक्ष में खड़ा हुआ गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित वोट बैंक में कहीं सेंध न लग जाए। इससे बचने के लिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि यह पिछड़ा-दलित गठबंधन नहीं बल्कि यादव-जाटव गठबंधन है। इस क्रम में पार्टी इन दोनों दलों में गठबंधन से नाराज वर्ग को भी साधने की योजना बनाएगी। यही कारण है कि शाह ने इस वर्ग को साधे रखने के साथ ही पार्टी के मिशन 50 फीसदी को हर हाल में अमली जामा पहनाने का निर्देश दिया है।


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