ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत के मार्गदर्शन में आयुष विभाग की होम्योपैथी यूनिट की ओर से भट्टोंवाला में होम्योपैथिक जन-जागरूकता एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 75 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान उन्हें होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को लेकर जागरूक किया गया।इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि भारत को प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की अतुलनीय विरासत प्राप्त है। जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियां शामिल हैं। एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने कहा कि आयुष आधुनिक चिकित्सा का एक विकल्प बन गया है। उन्होंने कहा कि संस्थान इन तमाम प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को आगे बढ़ाने और इनमें अनुसंधान के लिए कार्य करेगा जिससे जन सामान्य को लाभ मिल सके।
शिविर में
डॉ. रविंद्र अंथवाल ने 75 रोगियों का परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि शिविर में अस्थमा, त्वचा रोग, गठिया, पेट विकार, स्त्री रोग, बुखार आदि से ग्रस्त रोगियों का  उपचार किया गया व दवाइयां और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता सामग्री वितरित की गई।
आयुष विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना ने कहा कि आयुष को बढ़ावा देने के लिए एम्स संस्थान द्वारा ऐसे जागरूकता शिविरों का आयोजन नियमित तौर पर किया जा रहा है। इस मौके पर प्रमोद नेगी, हेमा बिष्ट, ग्राम प्रधान सतीश रावत,पूर्व बीडीसी मेंबर राजेश व्यास,देवेंद्र बैलवाल, कृपाल सिंह राणा, विनोद पोखरियाल, जितेंद्र रावत आदि ने सहयोग किया।

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