परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों ने पुष्प वर्षा और वेद मंत्रों से किया दिव्य स्वागत

प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में किया विश्व ग्लोब का जलाभिषेक

संगीत के माध्यम से देंगे पर्यावरण संरक्षण संदेश

परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नहीं-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 19 जून । प्रसिद्ध सूफी गायक कैलाश खेर पहुंचे परमार्थ निकेतन। परमार्थ निकेतन के प्रांगण में ऋषिकुमारों ने पुष्पवर्षा कर वेद मंत्रों से श्री कैलाश खेर का दिव्य स्वागत किया।
 श्री कैलाश खेर ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी से भेंट वार्ता कर आशीर्वाद लिया।
 ’कैलाश खेर एकेडमी आॅफ आर्ट’ के विषय में भी स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से विस्तृत चर्चा की। चर्चा के दौरान सबसे अच्छी बात यह थी की उत्तराखण्ड में संगीत का प्रशिक्षण देने हेतु एकेडमी खोलने के लिये शीघ्रता से प्रयास किये जाये। श्री कैलाश खेर ने स्वामी जी से कहा कि मुम्बई में इस पर विस्तार से चर्चा कर इस कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा। इस एकेडमी में संगीत के रूचि रखने वाले युवाओं की प्रतिभा को निखरने का अवसर दिया जायेगा और जो युवा आर्थिक रूप से सशक्त नहीं है उन्हें इस एकेडमी में संगीत का प्रशिक्षण दिये जाने के विषय में चर्चा की।
 श्री कैलाश खेर आज परमार्थ निकेतन से 20 रूद्राक्ष के पौधे भी अपने साथ मुम्बई लेकर गये ताकि वहां अपने बगीचे में रूद्राक्ष वाटिका तैयार कर उस सुरम्य वातावरण में संगीत की साधना कर सके। इससे दूसरे लोगों को भी पेड़-पौधे लगाने की प्रेरणा मिलेगी।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत का युवा प्रतिभा सम्पन्न है उनकी प्रतिभा को निखारने और तराशनें के किसी मंच की आवश्यकता होती है। कैलाश खेर एकेडमी आॅफ आर्ट’ एकेडमी युवाओं के संगीत के टैलेंट को निखारने में निश्चित रूपेन महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिये संगीत एकेडमी खोलने एक सेवा कार्य है; परमार्थ का कार्य है। मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। ’’परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।’’ अर्थात परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नहीं है। कबीरदास जी ने इसे बहुत ही सहज रूप से समझाया है कि ’वृक्ष कभी भी अपना फल खुद नहीं चखता, न ही नदी कभी अपना जल पीती है। उसे प्रकार श्रेष्ठ मनुष्य भी अपना कमाया धन परोपकार और परमार्थ के कार्यो में लगाते है।
  प्रसिद्ध गायक श्री कैलाश खेर ने कहा कि परमार्थ निकेतन मेरा दूसरा घर है। मैं आज जो भी कुछ हूँ वह माँ गंगा और पूज्य स्वामी जी महाराज के आशीर्वाद से हूँ। उन्होने कहा कि गंगा मुझे और मेरे संगीत को जीवंत बनाती है। मुझे यहां से नव जीवन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
 प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। स्वामी जी महाराज ने संगीत के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

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