ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश की इमरजेंसी में शाम को एक 4 साल का बच्चा लाया गया जो थोड़ी सी अनिद्रा की अवस्था में था । डॉक्टरों द्वारा पूछने पर पता चला की वह बच्चा दांतो की तकलीफ लेकर दांतो के डॉक्टर के पास गया था जहां प्रोसीजर करते हुए उसके मुंह से तकरीबन तीन सेंटीमीटर की पिन सांस की नली से अंदर चली गई।
एक्स-रे से पता चला कि वह पिन उसके फेफड़े के दाहिने भाग में जाकर अटक गई थी ।
एम्स के पलमोनरी मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर सुबोध कुमार ने तुरंत ब्रोंकोस्कोपी के जरिए सांस की नली से प्रवेश करते हुए उस पिन को बाहर निकाला ।
इस पूरी प्रक्रिया में एनेस्थेसिया विभाग के कंसलटेंट डॉ अजय द्वारा मरीज को पूर्ण बेहोशी की अवस्था रख कर पूरा किया गया । इस प्रक्रिया में लगभग 20 से 25 मिनट लगे ।
डॉक्टर सुबोध कुमार का कहना है कि अगर यह पिन समय पर नहीं निकाली जाती तो बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती थी जो कि उसके लिए घातक भी हो सकती थी ।  बच्चे को आज निगरानी में रखा गया है तथा कल सुबह उसे डिस्चार्ज दे दिया जाएगा ।  इस दरमियान बच्चे को बाहरी तथा आंतरिक कोई भी खरोच या चोट नहीं आई है।
एम्स निदेशक प्रो रविकांत ने समय पर उचित इलाज मुहैय्या करवा कर बच्चे की जान बचाने पर अपने चिकित्सकों की सराहना करते हुए कहा इमर्जेन्सी सेवाओं को जल्द ही विश्व स्तर की सुविधाएँ उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है जिस से लोगों सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाए मिल सकें।

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