केंद्र सरकार 4 नवंबर को विश्व फ़ूड डे के मौके पर खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन घोषित करने जा रही है. लेकिन उत्तर प्रदेश में खिचड़ी मात्र एक व्यंजन ही नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक भी है. यही वजह है कि जब पूरे देश में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है तो यूपी में इसे खिचड़ी पर्व के नाम से मनाया जाता है. इसके पीछे की मान्यता है कि भगवान शिव ने इस परंपरा की शुरुआत की थी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरक्षनाथ पीठ की खिचड़ी तो पूरे प्रदेश में प्रसिद्द है. मकर संक्रांति के दिन यहां बकायदे खिचड़ी मेला लगता है. भगवन गोरक्षनाथ को पहला भोग आज भी खिचड़ी का ही लगता है. मकर संक्रांति के दिन नेपाल राजघराने से बनकर आई खिचड़ी का ही भोग गोरक्षनाथ मंदिर में चढ़ता है. इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में लोगों में बांटा जाता है.
भगवान शिव ने शुरू की थी परंपरा
लोक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा का आरंभ भगवान शिव ने किया था और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मकर संक्रांति के मौके पर खिचड़ी बनाने की परंपरा का आरंभ हुआ था. ऐसी मान्यता है कि बाबा गोरखनाथ जी भगवान शिव का ही रूप थे. उन्होंने ही खिचड़ी को भोजन के रूप में बनाना आरंभ किया.
अलाउद्दीन खिलजी से जुड़ी है खिचड़ी खाने की परंपरा
पौराणिक कहानी के मुताबिक जब अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया तो उस समय नाथ संप्रदाय के योगी उन का डट कर मुकाबला कर रहे थे. लड़ाई के बाद वे इतना थक जाते थे कि उन्हें भोजन पकाने का समय ही नहीं मिलता था. जिस वजह से वे भूखे रह जाते थे. भूख की वजह से जब नाथ योगी कमजोर होने लगे तो बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने को कहा. बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा. सभी योगीयों को यह नया भोजन बहुत स्वादिष्ट लगा और इससे उनके शरीर में उर्जा का भी संचार हुआ.
आज भी गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ के मंदिर के समीप मकर संक्रांति के दिन से खिचड़ी मेला शुरू होता है. इस दिन लोगों को खिचड़ी को प्रसाद के रूप में दिया जाता है.
शादीशुदा महिलाओं को मायके से खिचड़ी भेजने की भी है परंपरा
इतना ही नहीं खिचड़ी पर्व उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में शादी से भी जुड़ा है. यहां मकर संक्रांति के अवसर पर शादीशुदा महिलाओं को उनके मायके से खिचड़ी भेजी जाती है. इसमें कपड़ों से लेकर अनाज, सब्जी, मिठाई और पैसे लड़की के ससुराल भेजे जाते हैं.


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