सरकारी मेडिकल काॅलेजों से कम फीस पर अब यूं ही नही कर सकेंगे कोर्स

देहरादून। प्रदेश में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कसनी शुरू कर दी है। सरकारी मेडिकल काॅलेजों से कम पफीस पर पढ़ाई पूरी कर निकलने वाले चिकित्सक अब आसानी से बांड का उल्लंघन नही कर पाएंगे। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बांड की धनराशी तीस लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दी है। ऐसे चिकित्सक जो पास आउट होकर बंाड का उल्लघंन करेंगे उन्हंे एक करोड का जुर्माना भरना पड़ सकता हैै।
प्रदेश के हल्द्वानी व श्रीनगर स्थित सरकारी मेडिकल काॅलेजों में कम फीस पर सरकार एमबीबीएस,एमडी व एमएस कोर्स करा रही है। ये कोर्स कम फीस पर छात्रों को एक बांड भरकर इस शर्त पर कराए गए कि वे काॅलेज से निकलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में कुछ समय तक अपनी सेवाएं देंगे। मगर इस शर्त का  पूर्ण रूप से पालन नही किया गया है। जिसे देखते हुए अब चिकित्सा शिक्षा विभाग ने और ज्यादा सख्त कदम उठाया है और बांड में भरी जाने वाली तीस लाख की राशि को बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया गया है। अब सरकारी मेडिकल काॅलेजों से कम फीस पर कोर्स कर निकलने वाले चिकित्सकों को बांड का उल्लघंन करना आसान नही होगा। अभी तक हल्द्वानी श्रीनगर मेडिकल काॅलेजों से 783 चिकित्सक निकल चुकें है। जिन्होंने एमबीबीएस,एमडी व एमएस का कोर्स रियायती दरों पर किया है। इनमें से 244 चिकित्सक ही सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हंै। 213 चिकित्सक नियुक्ति लेकर अनुपस्थित चल रहे हैं जबकि 218 का कुछ अता पता नही है। विभाग अब ऐसे चिकित्सकों को सरकारी सेवा में फिर से लाने के लिए कमर कस चुका है। गैरहाजिर व गायब चल रहे चिकित्सकों को पता लगाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 19 निजि अस्पतालों व काॅलेजों को नोटिस भेजकर जानकारी मांगी है,और उन्हे कार्यमुक्त करने को भी कहा गया है। जिनके पास सक्षम स्तर से काम करने की एनओसी नही है। इनमें दून के 9 मेडिकल काॅलेज व अस्पताल, हरिद्वार के 4 तथा हल्द्वानी के 6 संस्थान शामिल हैैं। इन चिकित्सकों की जानकारी मिलने के बाद कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। उल्लेखनीय है कि इस समय प्रदेश को 2715 चिकित्सकों की जरूरत है जबकि सरकारी चिकित्सा इकाईयों में मात्र 1069 चिकित्सक ही तैनात हैं। पर्वतीय जनपदों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतरी हुई हैं। 

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