राज्य स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के 12 लाख परिवारों को सरकार की लापरवाही से बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को गुरुवार तीन बजे के बाद से लाभ दिए जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.
बताया जा रहा है कि बीमा कंपनी बजाज आलियांज़ के साथ इस योजना के लिए किए गए कांट्रेक्ट को रिन्यू नहीं किया गया. यह कांट्रेक्ट दो महीने पहले ही ख़त्म हो गया था और अब तक कंपनी ने इसे इसलिए एक्टेंशन दिया था ताकि ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें.
लेकिन सरकार की ओर से इसमें कोई पहल न करने और कंपनी के बार-बार संपर्क करने पर भी जवाब न देन की वजह से बजाज आलियांज़ ने गुरुवार को सभी अस्पतालों में एमएसबीवाई कार्ड को स्वीकार करने पर रोक लगा दी.
कंपनी के इस फैसले से अस्पतालों में आने वाले नए मरीजों को कार्ड का लाभ नहीं मिल सकेगा. हालांकि रोक लगने से पहले भर्ती मरीज़ों को डिस्चार्ड होने तक इसका लाभ मिलेगा.
एमएसबीवाई योजना के तहत ऐसे परिवारों को 1.75 लाख रुपये का मुफ़्त इलाज मिलता है जो न सरकारी सेवा में हैं और न ही आयकर के दायरे में आते हैं.
सबको लिए स्वास्थ्य पहुंचाने को अपनी प्राथमिकता बताने वाली सरकार की हकीकत इस घटना से खुल जाती है. मुख्यमंत्री बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि वह दूर-दराज के इलाकों तक लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए काम कर रहे हैं.
पहाड़ों से पलायन के पीछे रोज़गार, शिक्षा के बाद सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ही माना जाता है और पलायन रोकने के लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवा का होना ज़रूरी है लेकिन इस तरह तो स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और ख़राब होगी.
महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग खुद मुख्यमंत्री के पास है और कई बार यह बात कही गई है कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग को एक स्वतंत्र मंत्री मिलना चाहिए लेकिन यह सीएम के पास मौजूद 40 विभागों में से एक बना हुआ है शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी महत्वपूर्ण स्कीम बंद हो गई है.


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