बीजेपी ऑफ़िस में लगने वाले जनता दरबारों में आमतौर पर लोगों की समस्याओं के लिए अधिकारियों को हड़काते दिखने वाले मंत्री सुबोध उनियाल का सोमवार का दूसरा रूप देखने को मिला.
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल आजकल सुर्खियों में इसलिए हैं क्योंकि जिस जनता दरबार में वह लोगों की समस्याएं सुन रहे थे उसी में हल्द्वानी के ट्रांस्पोर्टर प्रकाश पांडे ज़हर ख़ाकर पहुंच गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद बीजेपी का जनता दरबार 18 दिन बंद रहा और जब खुला तो सुबोध उनियाल ने ही जनता की समस्याएं सुनीं.
इस जनता दरबार में सुबोध उनियाल बेहद विनम्र और तर्क नज़र आ रहे थे और एक-एक समस्या को ध्यान से सहानुभूति के साथ सुन रहे थे. लेकिन सोमवार को इसका एकदम उलटा हुआ.
उन्होंने अपने पास फ़रियाद लेकर आए बेरोज़गारों को ही बुरी तरह हड़काया (देखें वीडियो). दरअसल पिछले 2 साल से उद्यान पर्यवेक्षक की परीक्षा न होने से अभ्यर्थी परेशान हैं.
सोमवार को उद्यान पर्यवेक्षक संयुक्त समिति के बेरोज़गार अभ्यर्थी विधानसभा में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल से मिले और मांग की कि जिस नियमावली के तहत परीक्षा होनी थी उसी को अस्तित्व में लाया जाए.
अचानक भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करने से छात्र खुद को ठगा से महसूस कर रहे हैं. इससे पहले मंत्री के न मिलने और सचिव के टका सा जवाब दे देने से परेशान बेरोज़गार अभ्यर्थी आंदोलन की राह पकड़ने का बयान भी दे चुके थे.
तो सुबोध उनियाल ने इन लोगों की तकलीफ़ समझने के बजाय आंदोलन की बात को पकड़ लिया और धमकाया कि अब चाहे कुछ हो जाए वह इन लोगों का काम नहीं करेंगे.
बेरोज़गार अभ्यर्थियों ने कहा कि सर 12,000 लोग परेशान हैं तो मंत्री ने कहा चाहे 20,000 हो जाओ नहीं सुनूंगा तुम्हारी बात. उन्होंने यहां तक कहा कि तुमने मुझे विधायक नहीं बनाया है.
बेरोज़गार अभ्यर्थी चुपचाप सुनते रहे और कोशिश करते रहे कि मंत्री उनकी बात सुन लें. आखिर मंत्री शांत हुए और उनकी बात सुनी भी लेकिन कोई आश्वासन नहीं दिया.


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