उत्तरकाशी : (कीत्तिनिधि सजवाण ) यह पर्व बैध पंचाग के अनुसार नये साल के रुप मे मनाया जाता है जाड भोटिया समुदाय के लोगो का यह त्योहार चार दिन चलता है पहले दिन दिपावली दुसरे व तीसरे दिन बधाई व  ध्याडी के बुलाना । फिर चोथे दिन बडे उल्लास व उत्सव के साथ वीरपुर मे सभी परिवार आटे की होली का पर्व मनाया गया ।इस होली मे एक दुसरे कोआटे का टीका लगाया जाता है ।फिर होलु खेली जाती है । यह होली खुशाली , लम्बी उम्र के मनाई जाती है ।जिसकेबाद शाम के सभी लोग अपनी पारंपारिक वेशभूषा पहनकर माता रिगली देवी के मन्दिर मे जाते है । जहा फिर मेला होता है ।जिसमे क्षेत्र की खुशाली एवं सुख समृद्वि के लिये माता रिगली देवी के मन्दिर मे प्राथ्रना की जाती है । बगोरी प्रघान भवान सिह ने कहा कि लोसर मनाने की यह पौराणिक परंपरा है । जो आज भी जारी है ।उनका प्रयास यह परंपरा  आगे भी जारी रहे । तथा इस पौराणिक एवं संस्क्रति के जीवंत बनाए रखने के साथ अपनी आने वाली पीढी को भी सौप सके।

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