ऋषिकेश। वल्र्ड वाटर-डे पर गुरूवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में 25- विश्वविद्यालयों के प्रसिद्ध साइंटिस्टों की गहन बैठक हुई। जिसमें पृथ्वी से घट रहे जल के स्रोतों, वर्षा के जल और अन्य स्रोतों के जल के अनावश्यक दोहन पर चिंता व्यक्त की गई। जिसके संरक्षण को लेकर साइंटिस्टों ने जल ने खाका भी तैयार किया। वैज्ञानिकों ने जन-जागरूकता अभियान पर बल देते हुए वर्षा के जल व घरों से निकलने वाले जल को संरक्षित करने की बात कही। इस दौरान उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, केरला, गोवा, गुजरात, वेस्ट बंगाल की विभिन्न यूनिवर्सिटियों के साइंटिस्ट शामिल थे।
डाॅ अभिजीत दास, वैज्ञानिक भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून, के मार्गदर्शन मंे मोनिका मेहरालु, साईंताका बनर्जी, अनीता देवी, मालवीका ओनियल, एस ए हुसैन, अंजना गोसाइन, मोनिका शर्मा, एस पी गोयल, अजित कुमार, नीना ग्रेवाल, सविता, अर्चना सह्यापक, के रमेश, संगीता अंगाॅम, बीएस ए अधिकारी, पारिवा डाॅब्रिअल, संदीप गुप्ता, बिलाल हबीब, पी के माथु, सुतिर्था दत्ता, दीपिका डोगरा, कमर कुरैशी, एस साधु कुमार, एकता शर्मा, वी के उनियाल, गोपी, रविन्दर नाथ त्रिपाठी, वी झाला, गीता गैरोला, सतकाशी शर्मा, शिवानी बर्थवाल, जयराज, शोभा भार्गव एवं अन्य इंजीनियरों, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीविदों ने सहभाग किया।


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