मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से जारी होने वाली धनराशि पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. पिछले एक साल में इस कोष से लगभग 32 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं. लेकिन, सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि कांग्रेसी विधायकों को बहुत कम रकम आवंटित की गई है. जबकि भाजपा के विधायकों और मंत्रियों की झोली खूब भरी गई. इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से हुआ है.


त्रिवेन्द्र सरकार के खर्चे उसके जी का जंजाल बन गए हैं. पहले सीएम कार्यालय में चाय पानी का खर्चा, फिर गैरसैंण में विधानसभा सत्र चलाने का बेतहाशा खर्चा और अब सीएम विवेकाधीन कोष की चर्चा जोरों पर हैं.

आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से जो सूचना निकल कर सामने आई है, उससे कांग्रेसियों की भौंहें तन गई हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा विधायकों की संस्तुति पर तो खजाना खोल दिया गया. लेकिन कांग्रेस के विधायकों की संस्तुति पर इस मद से पैसा देने में सरकार ने कंजूसी दिखा दी.

मंत्री मदन कौशिक की संस्तुति पर जहां एक साल में 52 लाख रुपए जारी किए गए तो दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की संस्तुति पर महज एक लाख रुपए जारी किया गया. कांग्रेस इससे आग बबूला है.


बता दें, सीएम विवेकाधीन कोष से ज्यादातर असहाय और गंभीर मरीजों के लिए पैसे जारी किए जाते हैं. देखेंं- इस मद में आवंटित पैसे में कैसे और कितना अंतर हैः


सबसे ज्यादा स्वीकृत संस्तुतियों वाले मंत्री

मदन कौशिक               52.24 लाख

अरविंद पांडे                 51.96 लाख

सतपाल महाराज           49.45 लाख

इसके विपरीत कांग्रेसी विधायकों की हालत बेहद पतली दिखाई देती हैः

इंदिरा हृदयेश                 1.05 लाख

करण माहरा                     25 हजार

प्रीतम सिंह                         5 हजार

सीएम विवेकाधीन कोष से पैसे के आवंटन को लेकर भले ही राजनीति फिर शुरू हो जाए लेकिन इससे एक मैसेज और समझा जा सकता है और वह है सीएम त्रिवेन्द्र से किस नेता की कितनी नज़दीकी.

Post A Comment: