राज्य में एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने वालों की खैर नहीं होगी. ट्रैफिक निदेशालय के प्रस्ताव के बाद शासन ने सभी एंबुलेंस में कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है. राजधानी देहरादून से इसकी शुरुआत भी हो गई है. कैमरे लगने के बाद आपातकालीन सेवा को रास्ता न देने वालों की पहचान हो सकेगी.

राजधानी देहरादून समेत राज्य के ज़्यादातर शहरों में सड़कों पर जाम लगना आम हो गया और यह बढ़ता ही जा रहा है. लेकिन चिंताजनक बात यह है कि ऐसी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं कि सड़कों पर खड़े वाहन आपातकालीन सेवा तक को जगह नहीं देते.

ट्रैफ़िक निदेशालय ने इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य की सभी एंबुलेंस में कैमरे लगाने का सुझाव दिया है. ट्रैफ़िक निदेशक केवल खुराना कहते हैं कि यह कैमरे एंबुलेंस चलने के साथ ही शुरू हो जाएंगे और सारे रास्ते रिकॉर्डिंग करते जाएंगे.

अगर कोई वाहन एंबुलेंस को रास्ता नहीं देता है तो एंबुलेंस चालक उसके ख़िलाफ़ शिकायत करेगा. रिकॉर्डिंग के आधार पर उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

देहरादून के सीएमओ वाईएस थपलियाल के अनुसार अब तक 10 एम्बुलेंस पर सीसीटीवी कैमरे लगाए भी जा चुके हैं. इनमें सरकारी और निजी अस्पतालों, दोनों की एंबुलेंस शामिल हैं. केवल खुराना का कहना है कि इस मुहिम को राजधानी में ही नहीं सभी जिलों में लागू किया जाएगा.

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