नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर सरकार की हीला हवाली को गंभीरता से लिया है। अदालत ने सरकारी पक्ष को लताड़ लगाते हुए इस मामले में प्रतिशपथ पत्र पेश करने को कहा है। इसके लिए 11 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया है। राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को यह निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस मामले में याचिका दायर की गई है। आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने बताया कि याचिका में कहा गया है कि सरकार के अब तक चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की है। जबकि आयोग ने संवैधिनक बाध्यता को देखते हुए लगातार सरकार से पत्रचार किया है। याचिका में कहा गया है प्रदेश में पिछले निकाय चुनाव 2013 में हुए थे। इस आधार पर इस बार भी 3 मई से पहले निकाय चुनाव संपन्न करा कर नए बोर्ड गठित करने की बाध्यता है। इसके लिए आयोग ने 19 मार्च को मतदाता सूची जारी कर दी है। वहीं चुनाव कार्यक्रम तैयार कर सरकार को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। इसके तहत 2 अप्रैल को चुनाव अधिसूचना जारी हो जानी चाहिए थी। 4 अप्रैल को नामांकन प्रक्रिया शुरू हो कर 29 अप्रैल तक मतगणना का कार्य संपन्न होना था लेकिन सरकार के स्तर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। जबकि संविधान के अनुच्छेद 243-य के तहत राज्य में तीन मई 20 18 तक नए निकायों का बोर्ड गठन होना जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि सरकार के नियत समय में चुनाव नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर रहा है। जिसमें ऐसी परिस्थिति में आयोग को अदालत में याचिका दायर करने के निर्देश दिए गए हैं। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार से प्रतिशपथ पत्र पेश करने को कहा है और अगली सुनवाई 11 अप्रैल को तय की है।
नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर सरकार की हीला हवाली को गंभीरता से लिया है। अदालत ने सरकारी पक्ष को लताड़ लगाते हुए इस मामले में प्रतिशपथ पत्र पेश करने को कहा है। इसके लिए 11 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया है। राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को यह निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस मामले में याचिका दायर की गई है। आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने बताया कि याचिका में कहा गया है कि सरकार के अब तक चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की है। जबकि आयोग ने संवैधिनक बाध्यता को देखते हुए लगातार सरकार से पत्रचार किया है। याचिका में कहा गया है प्रदेश में पिछले निकाय चुनाव 2013 में हुए थे। इस आधार पर इस बार भी 3 मई से पहले निकाय चुनाव संपन्न करा कर नए बोर्ड गठित करने की बाध्यता है। इसके लिए आयोग ने 19 मार्च को मतदाता सूची जारी कर दी है। वहीं चुनाव कार्यक्रम तैयार कर सरकार को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। इसके तहत 2 अप्रैल को चुनाव अधिसूचना जारी हो जानी चाहिए थी। 4 अप्रैल को नामांकन प्रक्रिया शुरू हो कर 29 अप्रैल तक मतगणना का कार्य संपन्न होना था लेकिन सरकार के स्तर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। जबकि संविधान के अनुच्छेद 243-य के तहत राज्य में तीन मई 20 18 तक नए निकायों का बोर्ड गठन होना जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि सरकार के नियत समय में चुनाव नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर रहा है। जिसमें ऐसी परिस्थिति में आयोग को अदालत में याचिका दायर करने के निर्देश दिए गए हैं। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार से प्रतिशपथ पत्र पेश करने को कहा है और अगली सुनवाई 11 अप्रैल को तय की है।


Post A Comment: