नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का तीन साल पुराना गठबंधन आखिरकार टूट गया है। भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। भाजपा जम्मू-कश्मीर प्रभारी राम माधव ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमने सबकी सहमति से आज यह निर्णय लिया है कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा अपनी भागीदारी को वापस लेगी। 87 सीटों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा के पास 25 सीट और पीडीपी के पास 28 सीटें हैं। महबूबा मुफ्ती शाम को अपना इस्तीफा राज्यपाल नरेंद्र नाथ वोहरा को सौंप सकती हैं।
राम माधव ने प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान बताया कि भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में अब पीडीपी के साथ मिलकर सरकार चलाना संभव नहीं है। एक विशेष बैठक के दौरान ये फैसला लिया गया कि पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया जाए। पीडीपी-बीजेपी गठबंधन को लेकर आगे चलना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को ध्यान में रखकर हमने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार चलाने का निर्णय लिया था, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में फ्रीडम ऑफ स्पीच खतरे में है। हाल में ही वहां एक वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी गई थी। केंद्र हमेशा जम्मू-कश्मीर सरकार को मदद देती रही है। जम्मू-कश्मीर को 80 करोड़ रुपये का विकास का पैकेज दिया गया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद जाकर वहां के हालात का समय-समय पर जायजा लिया, लेकिन हालात नहीं सुधर रहे हैं।
राम माधव ने प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान बताया कि भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में अब पीडीपी के साथ मिलकर सरकार चलाना संभव नहीं है। एक विशेष बैठक के दौरान ये फैसला लिया गया कि पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया जाए। पीडीपी-बीजेपी गठबंधन को लेकर आगे चलना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को ध्यान में रखकर हमने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार चलाने का निर्णय लिया था, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में फ्रीडम ऑफ स्पीच खतरे में है। हाल में ही वहां एक वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी गई थी। केंद्र हमेशा जम्मू-कश्मीर सरकार को मदद देती रही है। जम्मू-कश्मीर को 80 करोड़ रुपये का विकास का पैकेज दिया गया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद जाकर वहां के हालात का समय-समय पर जायजा लिया, लेकिन हालात नहीं सुधर रहे हैं।

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