देहरादून: सरकार भले ही निकाय चुनाव को लेकर पूरी तैयारी का दावा करे, लेकिन जैसी परिस्थितियां हैं वह इस तरफ इशारा कर रही हैं कि ये चुनाव सितंबर तक ही जाएंगे। माना जा रहा कि बदली परिस्थितियों को देखते हुए सरकार भी जल्दबाजी के मूड में नहीं है। साथ ही वह वर्षाकाल में चुनाव का रिस्क कतई नहीं लेना चाहेगी।
राज्य के 92 नगर निकायों में से 84 के लिए पूर्व में सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया था। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच सहमति भी बन गई थी। इस बीच सरकार के सामने उलझन तब आई, जब अदालत ने रुड़की नगर निगम को आरक्षण की प्रक्रिया में शामिल करने को कहा। इसे लेकर सरकार माथापच्ची कर ही रही थी कि कोर्ट ने 39 नगर पालिका परिषदों से संबंधित अधिसूचना निरस्त कर दी थी। यही नहीं, सरकार को तीसरा झटका तब लगा, जब प्रशासकों को निर्वाचित प्रतिनिधियों की देखरेख में ही कार्य करने के निर्देश अदालत ने दिए।
हालांकि, सरकार का कहना है कि वह इन तीनों मामलों से संबंधित अदालत के आदेशों का गहनता से अध्ययन कर इन्हें डबल बेंच में चुनौती देगी। अलबत्ता, इसे लेकर जैसी तस्वीर है, उसे देखते हुए सरकार भी जल्दबाजी के मूड में नहीं लगती। माना जा रहा कि प्रक्रिया में समय लगना तय है। इस बीच बरसात भी शुरू हो जाएगी और ऐसे में चुनाव खासी दिक्कत भरा साबित हो सकता है।
ऐसे में सरकार अब सितंबर में ही चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। बता दें कि निकायों का कार्यकाल तीन मार्च को खत्म होने के बाद इनमें छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त कर दिए गए थे। प्रशासकों का कार्यकाल सितंबर में खत्म होना है। 

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