हिमालय दिवस 9 सितंबर 2018 का संकल्प
हिमालय बचेगा तो देश बचेगा
सस्ंकृति बचेगी सस्कांर बचेगंे
गंगा, युमना और ब्रह्मपुत्र है तो हमारी संस्कृति है-पूज्य स्वामी चिंदानंद महाराज जी
ऋषिकेश, 28 जूलाई। हिमालय एनवारयर्नमेंट एडं कसंर्वेशन आर्गेनाइजे़शन के श्री अनिल जोशी जी ने परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से मुलाकात की जिसमें हिमालय को लेकर गंभीर चर्चा हुई और उन्होने अनुरोध किया कि इस बार का हिमालय दिवस परमार्थ निकेतन आश्रम में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में हो क्योकि समाज के सभी वर्गों में एक वर्ग साधु संतो का भी है जिनका दृष्किोण एवं मार्गदर्शन समाज के सभी वर्ग चाहें आर्थिक, राजनेतिक या समाजिक हर कोई सुनता व मानता है। डाॅ अनिल जोशी जी ने कहा कि हिमालय दिवस की कल्पना इसी आधार पर कि गई है कि हिमालय हमारी सस्ंकृति और सभ्यता का उदगम स्थल है हिमालय हमें बहुत कुछ देता है पूरे देश की प्यास हिमालय से ही बुझती है। अतः उनके अनुरोध स्वीकार करते हुये इस वर्ष हिमालय दिवस 9 सितंबर को देव भूमि के पावन गंगा तट परमार्थ निकेतन आश्रम में करने की स्वीकृति पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रदान की।
चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपनी विदेश यात्रा से आने के बाद हिमालय की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की। हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन व ग्लोबल वार्मिग के दुष्परिणाम विगत वर्षों में ही स्पष्ट दिखने लगे है केवल उत्तराखण्ड का ही उदाहरण लें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। जहाँ औसतन 12 से 15 सेमी. सालाना की दर से ऊपर की ओर सिकुड़ते जा रहे हिमालयी ग्लेशियरों से निकलने वाली गंगा तथा यमुना जैसी सदानीरा नदियां होने के बावजूद यहाँ के अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल के लिए मचने वाला हाहाकार प्रतिवर्ष गहराता जा रहा है क्योंकि यहाँ के प्राकृतिक जलस्रोत लगातार सूखते जा रहे हैं और पीने के पानी की कमी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हिमालय है तो हम है। बचपन से ही हिमालय की गोद में रहने का अवसर मिला है ये वो स्थान है जहाँ से ऋषि मुनियों ने विश्व मगंल के मंत्र सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् और वसुधेव कुटम्बकम् के मंत्र दिये है परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिेकेश गंगा के पावन तट से हिमालय की गोद से हिमालय को बचाने की आवाज पूरे विश्व में गूंजेगी।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आह्वान किया कि हम सबका पावन कर्तव्य है कि हम सब मिलकर हिमालय की रक्षा हेतु परिवार एंव मित्रो सहित सभी सस्थाएँ एक जुट हो कर, मिल कर काम करें।
हिमालय बचेगा तो देश बचेगा
सस्ंकृति बचेगी सस्कांर बचेगंे
गंगा, युमना और ब्रह्मपुत्र है तो हमारी संस्कृति है-पूज्य स्वामी चिंदानंद महाराज जी
ऋषिकेश, 28 जूलाई। हिमालय एनवारयर्नमेंट एडं कसंर्वेशन आर्गेनाइजे़शन के श्री अनिल जोशी जी ने परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से मुलाकात की जिसमें हिमालय को लेकर गंभीर चर्चा हुई और उन्होने अनुरोध किया कि इस बार का हिमालय दिवस परमार्थ निकेतन आश्रम में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्व में हो क्योकि समाज के सभी वर्गों में एक वर्ग साधु संतो का भी है जिनका दृष्किोण एवं मार्गदर्शन समाज के सभी वर्ग चाहें आर्थिक, राजनेतिक या समाजिक हर कोई सुनता व मानता है। डाॅ अनिल जोशी जी ने कहा कि हिमालय दिवस की कल्पना इसी आधार पर कि गई है कि हिमालय हमारी सस्ंकृति और सभ्यता का उदगम स्थल है हिमालय हमें बहुत कुछ देता है पूरे देश की प्यास हिमालय से ही बुझती है। अतः उनके अनुरोध स्वीकार करते हुये इस वर्ष हिमालय दिवस 9 सितंबर को देव भूमि के पावन गंगा तट परमार्थ निकेतन आश्रम में करने की स्वीकृति पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रदान की।
चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपनी विदेश यात्रा से आने के बाद हिमालय की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की। हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन व ग्लोबल वार्मिग के दुष्परिणाम विगत वर्षों में ही स्पष्ट दिखने लगे है केवल उत्तराखण्ड का ही उदाहरण लें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। जहाँ औसतन 12 से 15 सेमी. सालाना की दर से ऊपर की ओर सिकुड़ते जा रहे हिमालयी ग्लेशियरों से निकलने वाली गंगा तथा यमुना जैसी सदानीरा नदियां होने के बावजूद यहाँ के अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल के लिए मचने वाला हाहाकार प्रतिवर्ष गहराता जा रहा है क्योंकि यहाँ के प्राकृतिक जलस्रोत लगातार सूखते जा रहे हैं और पीने के पानी की कमी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हिमालय है तो हम है। बचपन से ही हिमालय की गोद में रहने का अवसर मिला है ये वो स्थान है जहाँ से ऋषि मुनियों ने विश्व मगंल के मंत्र सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् और वसुधेव कुटम्बकम् के मंत्र दिये है परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिेकेश गंगा के पावन तट से हिमालय की गोद से हिमालय को बचाने की आवाज पूरे विश्व में गूंजेगी।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आह्वान किया कि हम सबका पावन कर्तव्य है कि हम सब मिलकर हिमालय की रक्षा हेतु परिवार एंव मित्रो सहित सभी सस्थाएँ एक जुट हो कर, मिल कर काम करें।


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