हरिद्वार: गुरुकुल के तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गुरुकुल शिक्षा पद्धति में विज्ञान और आधुनिक तकनीक का समावेश करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं की राय थी कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए वैदिक शिक्षा का एकीकरण जरूरी है। सम्मेलन में देश के सभी गुरुकुलों को एक छतरी के नीचे लाने के लिए वैदिक शिक्षा बोर्ड के गठन की मांग का प्रस्ताव भी पारित किया। 

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के बैनर तले गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय परिसर हरिद्वार में आयोजित सम्मेलन का समापन बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किया। उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति के एकीकरण का खुले मंच से समर्थन किया। साथ ही आर्य समाज को गांवों तक जिंदा रखने के लिए जन जागरण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बजट में कतई कटौती नहीं होनी चाहिए। लेकिन, अफसोस है कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता को नजरअंदाज किया गया। गुरुकुल शिक्षा पद्धति में परंपरा, संस्कृत के साथ विज्ञान, आधुनिक तकनीक को भी जगह मिलनी चाहिए। 

चिंतक और वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रकाश वैदिक ने कहा गुरुकुल प्रणाली हमारी शिक्षा की नींव है, लेकिन इस पर हमने अब तक भवन खड़ा नहीं किया। महर्षि दयानंद के शिक्षा के सिद्धांत कार्ल माक्र्स से भी कहीं अधिक श्रेष्ठ हैं। इसमें समतामूलक समाज व एक समान शिक्षा की वकालत की गई थी। कहा कि, शिक्षा में क्रांति के दम पर ही अमेरिका विश्व का सबसे ताकतवर देश बन बैठा। भारत भी वैदिक शिक्षा को एकसमान  बनाकर विश्व में सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बन सकता है।
स्वामी अग्निवेश ने कहा कि गुरुकुलों की समान शिक्षा पद्धति से देश में राजनीतिक व आर्थिक सक्षमता आएगी। सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा आर्य समाज ने वेदों और गुरुकुल पद्धति से भारत को महिमामंडित करने का काम किया है। आयोजक संस्था के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि आर्य समाज के गुरुकुलों के लिए इस तरह के प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे। इससे पहले वेद एवं संस्कृत सम्मेलन सत्र में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। हरिद्वार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानंद व विद्यालय के प्रधानाचार्य डा विजेंद्र शास्त्री ने भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

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