स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं संस्कृति मंत्री भारत सरकार श्री महेश शर्मा जी से हुई भेंटवार्ता
आदिवासी महाकुम्भ से विभिन्न संस्कृतियांें के मेल का और विश्व एक परिवार है का संदेश पूरे विश्व में होगा प्रसारित
स्व और सृष्टि को जानने का आधार है भारतीय संस्कृति -
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 1 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और संस्कृति मंत्री भारत सरकार श्री महेश शर्मा जी की दिल्ली में भेंटवार्ता हुई।
स्वामी जी महाराज और माननीय मंत्री ने कुम्भ के दौरान होने वाले आदिवासी महाकुम्भ का आयोजन के विषय में विस्तृत चर्चा की। भारत की संस्कृति, सभ्यता, पर्व त्योहार और भाईचारा को विकसित करने पर भी वार्ता हुई।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत एक अद्भुत संस्कृति का देश है, भारतीय संस्कृति तिथि, पर्व, त्योहार और मेलमिलाप की संस्कृति है। कुम्भ के दौरान आदिम जाति-आदिवासी, जनजाति के लोग अलग-अलग रीति-रिवाजों और अनुभवों को साझा करेंगे तथा अपने तरीके से मनाये जाने वाले त्यौहार के विषय में विचार साझा करेंगे। स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति सभी को गले लगाने की संस्कृति है तथा विभिन्नता में एकता की संस्कृति है।
स्वामी जी ने कहा कि गंगा के घाट अलग-अलग है परन्तु गंगा तो एक है, उसी तरह पूरे देश में संस्कारों की गंगा एक ही बहती है। स्वामी जी ने बताया कि इस बार प्रयाग कुम्भ मेला के दौरान 37 देशों के आदिवासियों के प्रमुख को आमंत्रित किया जा रहा।
कुम्भ मेला के दौरान आमंत्रित सभी आदिवासी नेतृत्वकर्ता अपनी-अपनी संस्कृति, गीत-संगीत, रहन-सहन, सभ्यता, वेश-भूषा, पर्व और परम्परा इन सभी का आपस में सम्मिश्रण होगा।
स्वामी जी महाराज ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में 37 से अधिक देशों के आदिवासी, जनजाति, आदिम जाति के प्रमुखों को आमंत्रित किया जायेगा ताकि वे सभी अपनी संस्कृृतियों को आपस में साझा करे और अपनी संस्कृतियों के विषय में विचार साझा करेंगे। उन्होने बताया कि वे भारत में आकर गंगा, हिमालय और भारतीय संस्कृति को जानेगे तथा विभिन्न संस्कृतियों का सम्मिश्रण करने का प्रयास करेंगे।
स्वामी जी ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव और प्रयाग कुम्भ के दौरान ’कीवा पर्व’ का आयोजन किया जायेगा जिसमें वे सभी आदिवासी प्रमुख अपनी-अपनी पूजा पद्धति, ध्यान और ईश्वर आराधना जो की वे पृथ्वी के गर्भ (भूगर्भ) में बैठकर करते है उसका भी दर्शन होगा। इस प्रकार विविध परम्पराओं, संस्कृतियों और भाषाओं का आदान-प्रदान होगा तथा संगम के तट पर विभिन्न संस्कृतियों का संगम होगा। इस बार संगम के तट पर विभिन्न संस्कृतियों के, परम्पराओं के दर्शन होंगे। स्वामी जी महाराज ने कहा कि यह आदिवासी महाकुम्भ विभिन्न संस्कृतियांें के मेल का और विश्व एक परिवार है का संदेश पूरे विश्व में प्रसारित करेंगा।
संस्कृति मंत्री भारत सरकार महेश शर्मा जी ने कहा कि यह प्रयास कुम्भ के पवित्र आध्यात्मिक वातावरण में संस्कृतियों के मिलन के पर्व का जो आयोजन किया जा रहा है यह विश्व की विभिन्न संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करेंगी।
उन्होने कहा कि आदिवासी महाकुम्भ का आयोजन एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस आयोजन से हम सब मिलकर विश्व में एकता का संदेश प्रसारित करेंगा।
आदिवासी महाकुम्भ से विभिन्न संस्कृतियांें के मेल का और विश्व एक परिवार है का संदेश पूरे विश्व में होगा प्रसारित
स्व और सृष्टि को जानने का आधार है भारतीय संस्कृति -
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 1 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और संस्कृति मंत्री भारत सरकार श्री महेश शर्मा जी की दिल्ली में भेंटवार्ता हुई।
स्वामी जी महाराज और माननीय मंत्री ने कुम्भ के दौरान होने वाले आदिवासी महाकुम्भ का आयोजन के विषय में विस्तृत चर्चा की। भारत की संस्कृति, सभ्यता, पर्व त्योहार और भाईचारा को विकसित करने पर भी वार्ता हुई।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत एक अद्भुत संस्कृति का देश है, भारतीय संस्कृति तिथि, पर्व, त्योहार और मेलमिलाप की संस्कृति है। कुम्भ के दौरान आदिम जाति-आदिवासी, जनजाति के लोग अलग-अलग रीति-रिवाजों और अनुभवों को साझा करेंगे तथा अपने तरीके से मनाये जाने वाले त्यौहार के विषय में विचार साझा करेंगे। स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति सभी को गले लगाने की संस्कृति है तथा विभिन्नता में एकता की संस्कृति है।
स्वामी जी ने कहा कि गंगा के घाट अलग-अलग है परन्तु गंगा तो एक है, उसी तरह पूरे देश में संस्कारों की गंगा एक ही बहती है। स्वामी जी ने बताया कि इस बार प्रयाग कुम्भ मेला के दौरान 37 देशों के आदिवासियों के प्रमुख को आमंत्रित किया जा रहा।
कुम्भ मेला के दौरान आमंत्रित सभी आदिवासी नेतृत्वकर्ता अपनी-अपनी संस्कृति, गीत-संगीत, रहन-सहन, सभ्यता, वेश-भूषा, पर्व और परम्परा इन सभी का आपस में सम्मिश्रण होगा।
स्वामी जी महाराज ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में 37 से अधिक देशों के आदिवासी, जनजाति, आदिम जाति के प्रमुखों को आमंत्रित किया जायेगा ताकि वे सभी अपनी संस्कृृतियों को आपस में साझा करे और अपनी संस्कृतियों के विषय में विचार साझा करेंगे। उन्होने बताया कि वे भारत में आकर गंगा, हिमालय और भारतीय संस्कृति को जानेगे तथा विभिन्न संस्कृतियों का सम्मिश्रण करने का प्रयास करेंगे।
स्वामी जी ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव और प्रयाग कुम्भ के दौरान ’कीवा पर्व’ का आयोजन किया जायेगा जिसमें वे सभी आदिवासी प्रमुख अपनी-अपनी पूजा पद्धति, ध्यान और ईश्वर आराधना जो की वे पृथ्वी के गर्भ (भूगर्भ) में बैठकर करते है उसका भी दर्शन होगा। इस प्रकार विविध परम्पराओं, संस्कृतियों और भाषाओं का आदान-प्रदान होगा तथा संगम के तट पर विभिन्न संस्कृतियों का संगम होगा। इस बार संगम के तट पर विभिन्न संस्कृतियों के, परम्पराओं के दर्शन होंगे। स्वामी जी महाराज ने कहा कि यह आदिवासी महाकुम्भ विभिन्न संस्कृतियांें के मेल का और विश्व एक परिवार है का संदेश पूरे विश्व में प्रसारित करेंगा।
संस्कृति मंत्री भारत सरकार महेश शर्मा जी ने कहा कि यह प्रयास कुम्भ के पवित्र आध्यात्मिक वातावरण में संस्कृतियों के मिलन के पर्व का जो आयोजन किया जा रहा है यह विश्व की विभिन्न संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करेंगी।
उन्होने कहा कि आदिवासी महाकुम्भ का आयोजन एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस आयोजन से हम सब मिलकर विश्व में एकता का संदेश प्रसारित करेंगा।


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