देहरादून। सचिवालय सभागार में प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय कार्यों में पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित सरकारी ई मार्केट के प्रोत्साहन के लिए 15 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रव्यापी मिशन का प्रदेश में शुभारम्भ कृषि मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पारदर्शिता के मद्देनजर संचालित पेपरलेस संपर्क रहित और कैशलेस योजना को प्रभावी एवं सशक्त बनाने के लिए उपस्थित विभागाध्यक्षों से अपेक्षा की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जीरो टाॅलरेन्स की नीति के तहत कार्य किया जा रहा है। हमें पारदर्शिता एवं गुणवत्ता युक्त उत्पादों के लिए प्रतियोगिता का माहौल बनाना है, तथा भारत के प्रधानमंत्री भी सदैव इस बात के लिए चिन्तित है कि देश में पारदर्शिता एवं भ्रष्ट्राचार मुक्त वातावरण का निर्माण किया जाय, इसी के तहत भारत सरकार के साथ 27 दिसम्बर, 2017 को राज्य सरकार का सरकारी ई मार्केट के लिए एमओयू हुआ। प्रोक्योरमेंट रूल, 2017 में भी जीईएम के लिए प्रावधान किया गया है। सरकार द्वारा कि जाने वाली खरीद फरोख्त भी जीईएम के माध्यम से की जाए तथा इसका अनुपालन भी किया जा रहा है किन्तु समुचित जानकारी के अभाव में प्रदेश में शत प्रतिशत अनुपालन नही हो पाया है। जीईएम के अन्तर्गत इस कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को इसको भली भांति समझ कर अपने अपने विभाग में अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि प्रायः खरीद फरोख्त मे मीडियेटर के कारण उपभोक्ता को सीधा लाभ नहीं मिल पाता है किन्तु जीईएम के माध्यम से कम व्यय में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने प्रदेश में अब तक पंजीकृत 200 क्रय अधिकारी एवं 1000 सप्लायर को कम बताते हुए इसे और बढ़ाने के निर्देश दिए। कार्यशाला के लिए संयोजक विभागों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने जीईएम की अवधारणा पारदर्शिता, सक्रियता एवं समय पर सेवा उपलब्ध कराने की क्षमता को बढ़ाने के लिए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए। कृषि मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय में ई मार्केटिंग का कार्य पूर्व से चल रहा है जिसके लिए भारत सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को प्रशस्ति प्रमाण पत्र भी मिला है। उन्होंने आशा व्यक्त की प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों के उत्पादकों को भी जीईएम में अधिक से अधिक पंजीकृत कराने में मदद की जाए जिससे स्थानीय उत्पादकों को स्वस्थ बाजार मिलने से उनकी आर्थिकी बढ़ने के साथ-साथ पलायन भी दूर होगा। उन्होंने कहा कि ई पोर्टल मे उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागो को पुरूस्कृत करने के लिए वे मुख्यमंत्री से भी अनुरोध करेंगे।
सचिव अमित सिंह नेगी ने कहा कि सरकार को नागरिकांे के लिए प्रशासन का कुछ स्तर देनी पड़ती है जिसको देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 2017 में नई अधिप्राप्ति नियमावली के नियम-7 में जीईएम से खरीदने का प्राविधान किया है तथा खरीद फरोख्त में पारदर्शिता एवं जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में ही जीईएम का इस्तेमाल कर लिया गया तथा समय-समय पर विभागध्यक्ष की इससे सम्बंधित सवालों को हल किया जाता है। उन्होंने विभागाध्यक्ष/वित्त नियंत्रक व अन्य अधिकारियों से अपेक्षा कि वो जीईएम पोर्टल पर क्रय की बारीकियों को समझे तथा कठिनाईयों के निराकरण के बारे में सवाल पूछें व उनका समाधान भी करें। साथ ही स्थानीय व्यापारियों को जीईएम मे पंजीकृत करने हेतु प्रेरित करे। इसमें अधिक से अधिक व्यापारियों के पंजीकरण से एक स्वस्थ व बेहतर प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। हमारे व्यापारी बंधुओं को न सिर्फ प्रदेश के शासकीय खरीद में भागीदारी करने का मौका मिलेगा अपितु देश भर मे फैले हुए अन्य मंत्रालयों, विभागों, निगमों व सरकारी कम्पनियों में होने वाली अधिप्राप्ति प्रक्रिया में अपनी भागीदारी निभा सकते है, इससे अपनी आय बड़ा सकते हैं और प्रदेश के विकास में अपना योगदान दे सकते है। साथ ही प्रदेश के अधिक से अधिक उत्पादकों का पंजीकरण कराएं जिसमें स्थानीय उत्पादकों को बाहरी राज्यों में मांग बढ़े तथा उनकी आय भी बढ़े। उन्होंने विभागाध्यक्षों से कार्यालय में उपयोग मे आने वाली वस्तु एवं सेवाओं मे प्राथमिकता के साथ खरीदने के निर्देश दिये। इस अवसर पर अपर सचिव/विभागाध्यक्ष, तकनीकि शिक्षा अहमद इकबाल, अपर सचिव वित्त भूपेश तिवारी, वित्त नियंत्रक दिनेश चन्द्र लोहानी सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष एवं वित्त नियंत्रक मौजूद थे।


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