देहरादून: उत्तराखंड में मौसम ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है।जगह-जगह नदी नाले उफान पर हैं। जिससे लोगों में दहशत फैल गर्इ है। वहीं मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों के दरम्यान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
विदाई की तरफ बढ़ रहा मानसून सोमवार को उत्तराखंड में फिर से मुसीबतें लेकर आया। तीन दिनों से हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित है। भूस्खलन की वजह से केदारनाथ पैदल ट्रैक का करीब 50 मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों के खतरे को देखते हुए केदारनाथ यात्रा को फिलहाल रोक दिया है। तीर्थयात्रियों से भीमबली से वापस लौटा दिया गया है। पड़ावों पर फंसे 1340 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। बदरीनाथ हाईवे दूसरे दिन दोपहर बाद खुल गया। जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे भी दिनभर खुलने और बंद होने का सिलसिला जारी रहा। यमुनोत्री मार्ग पर स्यानाचट्टी में फंसे 150 यात्री चौदह घंटे बाद शाम को रास्ता खुलने के बाद निकल पाए। कैलास मानसरोवर यात्रा पूरी कर गुंजी पहुंचे आखिरी दो दल तीसरे दिन भी फंसे रहे।
राज्य के अधिकांश जिलों में रविवार रात लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते शहरों में जलभराव और पर्वतीय इलाकों में मुख्य एवं संपर्क मार्ग बाधित होने से जनजीवन प्रभावित हो रखा है। चारों धामों में ऊंची चोटियों पर हिमपात हुआ। बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में दूसरे दिन दोपहर बाद खुल गया। गंगोत्री हाईवे डबराणी और यमुनोत्री हाईवे डाबरकोट में पूरे दिन खुलता और बंद होता रहा। इस बीच, प्रशासन ने मौसम के तेवरों को देखते हुए दोपहर करीब सवा बजे केदारनाथ यात्रा को फिलहाल रोक दिया है।
इस ट्रैक पर भीमबली से करीब तीन किलोमीटर आगे लिनचोली के पास करीब 50 मीटर सड़क मलबे में बह गई। साथ ही पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने से खतरा बना हुआ है। इसको देखते हुए केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को भीमबली से ही लौटा दिया जा रहा है। केदारनाथ धाम में दर्शन कर लौट रहे यात्रियों को एसडीआरएफ की मदद से सुरक्षित स्थानों पर लाया जा रहा है। इन पड़ावों पर 1340 यात्री फंसे हुए हैं। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे फाटा के पास डोलिया देवी में दरार आने से यहां आवागमन रोक दिया गया है।


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