ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान के देहरादून रोड स्तिथ कार्यालय में आज साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के तहत निर्धारित विषय "परिवार में महिलाओं को पारवरिक होना उचित या आधुनिक" पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व शांति हेतु हवन यज्ञ करने आहुति डालकर किया गया। इस मौके पर  मुख्य वक्ता विचारक बजरंग मुनि जी ने कहा कि परिवार व्यवस्था के ठीक संचालन में पुरूषों की तुलना में महिलाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है । परिवार में महिला या पुरूष एक-दूसरे के पूरक होते हैं। परिवार की आंतरिक व्यवस्था में महिलाएॅ तथा बाह्य में पुरूष प्रधान होते हैं किन्तु कुल मिलाकर सब बराबर हैं।उन्होंने आगे कहा कि
 परंपरागत परिवारों में आयी विकृतियों के कारण महिलाएॅ पारम्परिक व्यवस्था की अपेक्षा आधुनिकता की ओर तेजी से बढ रही हैं। अनुशासन और नियंत्रण अलग-अलग होते हैं। परंपरागत परिवारों में अनुशासन की जगह नियंत्रण बढा और आधुनिक परिवारों में अनुशासन की जगह उच्श्रृंखलता। परंपरागत परिवारों की महिलाओं में घुटन अधिक है टूटन कम। आधुनिक महिलाओं में परिवार के प्रति टूटन अधिक है घुटन कम। दोनों स्थितियां ठीक नहीं। पुरूष प्रधान व्यवस्था विकृति नहीं बल्कि व्यवस्था है किन्तु परिवार का प्रमुख, परिवार प्रमुख तक सीमित रहना चाहिये, मालिक नहीं। वर्तमान पारंपरिक परिवारों में मुखिया मालिक बन गये जो एक मुख्य विकृति है।
परंपरागत महिलाएॅ परिवार के सुचारू संचालन, सन्तानोत्पत्ति तथा बच्चों के नैतिक विकास को अधिक महत्वपूर्ण मानती हैं तो आधुनिक महिलाएॅ स्वतंत्रता, सेक्स तथा बच्चों के भौतिक विकास को अधिक महत्तवपूर्ण मानती हैं।परंपरागत महिलाएॅ सहजीवन को भौतिक विकास की तुलना में अधिक महत्व देती हैं तो आधुनिक महिलाएॅ भौतिक विकास को सहजीवन की तुलना में अधिक महत्व देती हैं परंपरागत परिवार व्यवस्था में सुधार तथा आधुनिक परिवार व्यवस्था पर अंकुश आवश्यक है। परंपरागत या आधुनिक परिवार की जगह लोकतांत्रिक परिवार व्यवस्था एकमात्र समाधान है। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के डा राजे नेगी ने किया। इस अवसर पर समाजसेवी कमल सिंह राणा,अभ्युदय द्विवेदी,जनार्दन केर वान,सरदार हरिचरण सिंह,नवीन कुमार शर्मा,सुतिश गुप्ता,आर सी भट्ट, अनुसूया प्रसाद बंगवाल, सूरत सिंह रोथान, विमला नौटियाल, संदीप सिंह, नरेश वर्मा,मंगल सिंह,टीकाराम देवरानी उपस्थित थे।

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