देहरादून। पारंपरिक तकनीकी ज्ञान और विज्ञान का समावेश करते हुए राज्य सरकार ने उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक बायोटेक्नोलॉजी आधारित कम्युनिटी मॉडल बनाने का निश्चय किया है। इनमें हेस्को संस्था के माध्यम से ग्रामीण तकनीकी मॉडल विकसित कर आमजन की समझदारी बढ़ाने का कार्य किया जाएगा। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने हर जिले में इन मॉडल को तैयार करने के मद्देनजर कृषि निदेशक को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री उनियाल ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी बेस्ड कम्युनिटी मॉडल के जरिये लोगों को गोबर गैस, सोलर प्लांट, घराट जैसे पारंपरिक संसाधनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसमें हेस्को संस्था तकनीकी सहयोग मुहैया कराएगी। साथ ही प्रत्येक मॉडल में लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह प्रयोग जहां लोगों की समझ बढ़ाने में मददगार होगा, वहीं ग्रामीण तकनीकी का बेहतर उपयोग हो सकेगा।इससे पहले कृषि मंत्री ने सुबह ग्राम शुक्लापुर में हेस्को संस्था की ग्रामीण तकनीकी का निरीक्षण कर हेस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ.अनिल प्रकाश जोशी से मंथन किया। इस दौरान ही निर्णय लिया गया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक बायोटेक्नोलॉजी बेस्ड कम्युनिटी मॉडल तैयार किए जाएंगे। कृषि मंत्री के मुताबिक वन्यजीवों द्वारा मनुष्यों और खेती को पहुंचाए जा रहे नुकसान के मद्देनजर इस मसले के समाधान को लेकर भी चर्चा की गई। साथ ही ऐसी फसलें पनपाने पर बात हुई, जिन्हें वन्यजीव नुकसान पहुंचा सकें। कृषि मंत्री के मुताबिक जाखधार-चकराता क्षेत्र में फलोत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए इसे फलपट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा। इस सिलसिले में जल्द ही उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।

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