ऋषिकेश, 9 सितम्बर। हिमालय दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में हिमालय चिंतन-मंथन शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें विश्व विख्यात पर्यावरणविद्, जल एवं पर्यावरण वैज्ञानिक, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरू, पूज्य संत, राजनीतिज्ञ, शोधछात्र, विभिन्न संस्थाओं के संस्थाप्रमुख एंव अन्य गणमाण्य जन प्रतिनिधियों ने सहभाग किया।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में प.श्री एवं विख्यात पर्यावरणविद् डाॅ अनिल जोशी जी ने भारत के विभिन्न प्रांतों से आये पर्यावरण विशेषज्ञों से हिमालय के संरक्षण हेतु सर्वप्रथम जल, जंगल, जमीन, वृक्षों के संरक्षण की बात करते हुये विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। देश और विदेश से आये पर्यावरणविद्ों ने भी इस अवसर पर आपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किये।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने हिमालय को संरक्षित करने तथा हिमालय के ईको सिस्टम को बनायें रखने के लिये पहाड़ों को ’’स्प्रिरिचुअल हब’’ में परिवर्तित करने पर जोर दिया। उन्होने सरकार, सेना, संत, समाज, संस्थायें, साइंटिस्ट आदि मिलकर कार्य करने की बात कहीं। स्वामी जी ने कहा कि हिमालय के ईको सिस्टम को डेवलप करने के लिये सभी देशवासियों को जमीनी स्तर पर प्रयास करने होगे। हमें छोटे प्रयास यथा प्लास्टिक का उपयोग बंद करें, नदियों में गिरते नालों को टैप करना, कचरे-कूड़े का उचित प्रबंधन, निर्माण कार्य सतत विकास पर आधारित हो, खेतों में अपशिष्ट को न जलाया जाये, हरित शवदाह गृह का उपयोग करे, प्रत्येक उत्सव को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ना जैसे छोटे छोटे कदमों से भी सकारात्मक परिणामों को प्राप्त किया जा सकता है। हिमालय केवल पहाड़ों के लोगों को ही जीवन प्रदान नहीं करता बल्कि अमेजन के बाद हिमालय ही दुनिया को शुद्व प्राणवायु देने वाला दूसरा बड़ा स्रोत है तथा भारत में बहने वाली 11 प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलती है। हिमालय भारत के 65 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझाने का माध्यम है। हिमालय से प्राप्त अमूल्य वन सम्पदा और जड़ी-बूटी किसी न किसी रूप से विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। हिमालय भारत ही नहीं विश्व को भी प्राणवान बना रहा है। अतः हमें यह समझना होगा की हिमालय है तो हम है। हिमालय हमारा रखवाला ही नहीं प्राणदाता और जीवनदाता भी है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने भेजे अपने संदेश में तीन सी अर्थात केयर, कंजर्व, कोआॅपरेट और तीन पी अर्थात प्लान, प्रोड्यूस और प्रमोट के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया।
तृतीय सत्र में सभी विद्वानों एवं पूज्य संतों ने अपने विचार व्यक्त किये। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को हिमालय संरक्षण महासंकल्प कराया, सभी संतों एंव पर्यावरणविद्ों ने हिमालय उद्घोषणा की फिर विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया और राष्ट्रीय गीत के साथ सम्मेलन के समापन की घोषणा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने की।
हिमालय चिंतन-मंथन शिखर सम्मेलन साध्वी भगवती सरस्वती जी के कुशल संचालन में सम्पन्न हुआ। स्वामी जी महाराज ने हिमालय संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा सभी अतिथियों को भेंट किया तत्पश्चात सभी ने दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।
माननीय वित्तमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार श्री प्रकाश पंत जी, माननीय शिक्षामंत्री, उत्तराखण्ड सरकार श्री धनसिंह जी,माननीय कृषिमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार श्री सुबोध उनियाल जी, पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, इमाम उमर अहमद इलियासी जी सुन्नी धर्मगुरू, मौलाना सैयद कोकब मुस्तबा, शिया धर्मगुरू, डाॅ अनिल जोशी जी, महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, आदरणीय ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, अभिनेत्री प्रियंका कोठारी, वेन खेपो रंगडोलजी, ड्राईकंग कागुयू रिनपोंजेजी, उत्तराखण्ड विधानसभा उपाध्यक्ष माननीय रघुनाथ सिंह जी, किशोर उपाध्याय जी, स्वामी ऋषिश्वरानन्द जी, हठयोगी जी, महंत दुर्गादास जी, भास्कर प्रकाश जी एवं डब्ल्यू आई आई, डब्ल्यूडब्ल्यू एफ, सी आई आई, नाबार्ड, टी एच डी सी, डी एलएफ इंडस्ट्रीज और अन्य प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहे।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में प.श्री एवं विख्यात पर्यावरणविद् डाॅ अनिल जोशी जी ने भारत के विभिन्न प्रांतों से आये पर्यावरण विशेषज्ञों से हिमालय के संरक्षण हेतु सर्वप्रथम जल, जंगल, जमीन, वृक्षों के संरक्षण की बात करते हुये विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। देश और विदेश से आये पर्यावरणविद्ों ने भी इस अवसर पर आपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किये।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने हिमालय को संरक्षित करने तथा हिमालय के ईको सिस्टम को बनायें रखने के लिये पहाड़ों को ’’स्प्रिरिचुअल हब’’ में परिवर्तित करने पर जोर दिया। उन्होने सरकार, सेना, संत, समाज, संस्थायें, साइंटिस्ट आदि मिलकर कार्य करने की बात कहीं। स्वामी जी ने कहा कि हिमालय के ईको सिस्टम को डेवलप करने के लिये सभी देशवासियों को जमीनी स्तर पर प्रयास करने होगे। हमें छोटे प्रयास यथा प्लास्टिक का उपयोग बंद करें, नदियों में गिरते नालों को टैप करना, कचरे-कूड़े का उचित प्रबंधन, निर्माण कार्य सतत विकास पर आधारित हो, खेतों में अपशिष्ट को न जलाया जाये, हरित शवदाह गृह का उपयोग करे, प्रत्येक उत्सव को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ना जैसे छोटे छोटे कदमों से भी सकारात्मक परिणामों को प्राप्त किया जा सकता है। हिमालय केवल पहाड़ों के लोगों को ही जीवन प्रदान नहीं करता बल्कि अमेजन के बाद हिमालय ही दुनिया को शुद्व प्राणवायु देने वाला दूसरा बड़ा स्रोत है तथा भारत में बहने वाली 11 प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलती है। हिमालय भारत के 65 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझाने का माध्यम है। हिमालय से प्राप्त अमूल्य वन सम्पदा और जड़ी-बूटी किसी न किसी रूप से विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। हिमालय भारत ही नहीं विश्व को भी प्राणवान बना रहा है। अतः हमें यह समझना होगा की हिमालय है तो हम है। हिमालय हमारा रखवाला ही नहीं प्राणदाता और जीवनदाता भी है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने भेजे अपने संदेश में तीन सी अर्थात केयर, कंजर्व, कोआॅपरेट और तीन पी अर्थात प्लान, प्रोड्यूस और प्रमोट के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया।
तृतीय सत्र में सभी विद्वानों एवं पूज्य संतों ने अपने विचार व्यक्त किये। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को हिमालय संरक्षण महासंकल्प कराया, सभी संतों एंव पर्यावरणविद्ों ने हिमालय उद्घोषणा की फिर विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया और राष्ट्रीय गीत के साथ सम्मेलन के समापन की घोषणा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने की।
हिमालय चिंतन-मंथन शिखर सम्मेलन साध्वी भगवती सरस्वती जी के कुशल संचालन में सम्पन्न हुआ। स्वामी जी महाराज ने हिमालय संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा सभी अतिथियों को भेंट किया तत्पश्चात सभी ने दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।
माननीय वित्तमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार श्री प्रकाश पंत जी, माननीय शिक्षामंत्री, उत्तराखण्ड सरकार श्री धनसिंह जी,माननीय कृषिमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार श्री सुबोध उनियाल जी, पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, इमाम उमर अहमद इलियासी जी सुन्नी धर्मगुरू, मौलाना सैयद कोकब मुस्तबा, शिया धर्मगुरू, डाॅ अनिल जोशी जी, महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, आदरणीय ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, अभिनेत्री प्रियंका कोठारी, वेन खेपो रंगडोलजी, ड्राईकंग कागुयू रिनपोंजेजी, उत्तराखण्ड विधानसभा उपाध्यक्ष माननीय रघुनाथ सिंह जी, किशोर उपाध्याय जी, स्वामी ऋषिश्वरानन्द जी, हठयोगी जी, महंत दुर्गादास जी, भास्कर प्रकाश जी एवं डब्ल्यू आई आई, डब्ल्यूडब्ल्यू एफ, सी आई आई, नाबार्ड, टी एच डी सी, डी एलएफ इंडस्ट्रीज और अन्य प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहे।


Post A Comment: