ऋषिकेश। गंगा रक्षा के लिए अनशनरत रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ( प्रो। जीडी अग्रवाल) की 11 अक्टूबर को हुई मौत के बाद एक बार फिर एम्स प्रशासन असहज हो गया है। हाईकोर्ट ने एम्स प्रशासन को सीधे तौर पर आदेश देते हुए कहा कि हाईकोर्ट आदेश दिया है कि स्वामी सानंद के शव को 8 घंटे में मातृ सदन का सौपें और 72 घंटे तक मातृ सदन में जनता दर्शन के लिए रखे।
स्वामी सानंद की 111 दिन के आमरण अनशन के बाद उपचार के दौरान एम्स ऋषिकेश में मौत हो गई थी। स्वामी सानंद ने अपनी देह एम्स को मेडिकल के बच्चों की रिसर्च के लिए दान कर दी थी। जिसके कारण एम्स प्रशासन ने सानंद के परिजनों व मातृसदन के मांगने के बावजूद भी सानंद का शव उन्हें नहीं दिया। इस दौरान उनके परिजनों से सीधे एम्स प्रशासन पर सानंद के शव के दर्शन भी न करने देने का आरोप लगाया था। उनके परिजन व स्थानी लोग सानंद के अंतिम दर्शन को लेकर एम्स ऋषिकेश के सामने धरने पर बैठ गये थे जिसके बाद एम्स प्रशासन ने उन्हें दर्शन कराये लेकिन शव नहीं दिया। जिसको लेकर मातृ सदन के उनके साथियों ने उनका शव लेने के लिए हाईकोर्ट में याचिका डाली। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को एम्स प्रशासन को आदेश देते हुए कहा कि आठ घंटे के भीतर सानंद का शव मातृ सदन को दिया जाए और उनके शव को मातृ सदन में जनता दर्शन के लिए 72 घंटे तक रखा जाए। जिसके कारण एम्स प्रशासन के हडकंप मच गया। कोर्ट का आदेश आने के बाद एम्स प्रशासन में बैठकों को दौर चल रहा है। जबकि एम्स के निदेशक किसी काम के बाहर गये हुए हैं।
गंगा नदी के संरक्षण को लेकर पिछले 111 दिनों से अनशन कर रहे मशहूर पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का 11 अक्टूबर की दोपहर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। वह 86 साल के थे। वह हरिद्वार स्थित मातृ सदन में पिछले 22 जून से अनशन कर रहे। स्वामी सानंद को जल त्यागने के बाद प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया था।
सानंद ने अपने हाथों से लिखे अंतिम प्रेस रिलीज में बताया था कि उनके खून में पोटेशियम की मात्रा खतरनाक रूप से कम हो चुकी है। इसीलिए उन्होंने डॉक्टरों की सलाह पर 500 एमएल तरल मुंह एयर ड्रिप के जरिये लेने पर अपनी सहमति दे दी थी।
स्वामी सानंद को हाई ब्लड प्रेशर, हर्निया के साथ-साथ कोरोनरी आर्टरी रोग भी था तथा अनशन के कारण उनकी सेहत और बिगड़ गयी थी। उनके शरीर में जरूरी पोटेशियम की मात्रा 3.5 से घटकर 1.7 ही रह गई थी। उन्होंने बताया कि स्वामी सानंद ने अपना शरीर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सा शिक्षा के छात्रों के उपयोग के लिए दान कर दिया था।
बता दें कि आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर रहे स्वामी सानंद वर्ष 2008 में उस वक्त चर्चा में आए थे, जब वह उत्तरकाशी में मणिकर्णिका घाट पर भागीरथी पर बन रही पनबिजली परियोजनाओं को तत्काल बंद करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। उन्होंने नौ सितंबर को घोषणा की थी कि वह अक्टूबर में जल त्याग देंगे, जिसके बाद 11 सितंबर को नेशनल मिशन फॉर गंगा क्लीनिंग के निदेशक ने उनसे वार्ता की और 13 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें समर्थन दिया था।


Post A Comment: