ऋषिकेश। तीर्थ नगरी में जहां एक और दीपावली की धूम रही वहीं लोग आतिशबाजी के कारण पटाखों से निकलने वाले बारूद के कणों एवं चिंगारी की लपटों में आने के कारण चोटिल भी हुवे।ऋषिकेश के सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों में ऐसे मरीजों की भीड़ देखने को मिली। नगर के नेत्र चिकित्सक डॉ राजे नेगी ने बताया कि उनके क्लीनिक में भी आतिश बाजी के कारण आंखो में लगी चोट का उपचार हेतु युवा एवं बच्चे पहुंचे थे।विस्थापित निवासी बीर सिंह अपने बच्चो को पटाखों की लपेट से बचाते हुवे स्वयं चोटिल हो गए।वहीं रानिपोखरी निवासी चौदह वर्षीय भरत सिंह एवं बापू ग्राम निवासी  निवासी वैभव भी आंखो में बारूद   जाने के कारण उपचार के लिए आए थे। डॉ नेगी ने बताया कि अधिकतर  रोगियों की आंखो की पलकें  एवं आंखो के आसपास की त्वजा जली हुई थी।एक मरीज की आंखो की पुतली में जख्म की शिकायत पाई गई जिनका उपचार किया जा चुका है।उन्होंने बताया कि आंखो की पुतली में जख्म होने से कई बार आंखो की रोशनी प्रभावित हो जाती है।आमतौर से पटाखों से निकलने वाले विषेले धुवें एवं चिंगारी के कारण आंखो में जलन,खुजली, लालीपन एवं दर्द की शिकायत हो जाती है जो हमारी आंखो के लिए बेहत नुकसान दायक साबित होती है।जिसका तुरन्त उपचार किया जाना जरूरी है वरना आंखो की रोशनी प्रभावित हो सकती है।उन्होंने रोगियों से ऐसी स्थति में प्राथमिक उपचार के रूप में आंखो को ताजे एवं ठंडे पानी से धोने एवं एंटीबायोटिक्स क्रीम एवं ड्रॉप्स इस्तेमाल करने की सलाह दी।

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