देहरादून। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के हालिया विधानसभा चुनाव के परिणाम को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता है। इतना जरूर है कि इस चुनाव के बाद भाजपा व कांग्रेस दोनों को अपनी मौजूदा स्थिति पर मंथन करने और उसे बेहतर बनाने का अवसर मिल गया है। यह बात 'जागरण विमर्श' में डीएवी पीजी कॉलेज के राजनीति शास्त्र के रिटायर्ड एचओडी डॉ. डीएन भटकोटी ने कही।
मंगलवार को दैनिक जागरण के पटेलनगर स्थित कार्यालय में 'तीन राज्यों के चुनाव नतीजों का संदेश' विषय पर जागरण विमर्श का आयोजन किया गया। विमर्श को संबोधित करते हुए डॉ. डीएन भटकोटी ने कहा कि तीन राज्यों के चुनाव परिणाम में न तो भाजपा हारी है, न ही कांग्रेस जीती है। चुनाव परिणाम को लेकर अति उत्साहित कांग्रेस सिर्फ छत्तीसगढ़ की जीत का श्रेय ले सकती है।
वरना दो अन्य राज्यों में अंतर इतना अधिक नहीं है कि उसे वर्ष 2019 के परिणाम को लेकर किसी तरह का संदेश माना जाए। बात जब हालिया विधानसभा चुनाव की हो रही है तो तेलंगाना व मिजोरम को क्यों नजरंदाज किया जाना चाहिए। क्योंकि कांग्रेस यदि तीन राज्यों की जीत को आधार बना रही है तो उसे इन दो राज्यों में मिली करारी शिकस्त पर भी मंथन करना चाहिए। इन दो राज्यों के परिणाम बताते हैं कि राजनीति का चश्मा पूरे देश के लिए एक नहीं हो सकता।


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