ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के कार्डियो विभाग ने काफी समय से हृदय रोग से ग्रसित महिला के दो बंद पड़े वाल बैलून विधि से खोल दिए। एनजीयोग्राफी पैटर्न की इस तकनीक को अपनाए जाने से जहां महिला को सर्जरी का जोखिम नहीं उठाना पड़ा वहीं गरीब पृष्ठभूमि की इस महिला का कम खर्च में ही हृदय रोग का उपचार संभव हो पाया।
महिला को उपचार में आयुष्मान भारत योजना से भी करीब 25 हजार की मदद मिली है। रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को लागू कर दिया गया है जिसके तहत हृदय रोग से ग्रस्त रोगियों को एनजीयोप्लास्टी व बेसिक पेसमेकर की सुविधा निशुल्क दी जा रही है। जिससे काफी संख्या में मरीज इस योजना का लाभ ले रहे हैं। इस योजना से प्रतिदिन दो से तीन रोगियों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि संस्थान में बीपीएल कार्ड धारकों को निशुल्क एनजियोग्राफी सुविधा व एनजीयोप्लास्टी में 25 हजार तक की रियायत दी जा रही है।
 एम्स के कॉर्डियोलॉजी विभाग के चिकित्सक डा.रोहित वालिया ने एक 25 वर्षीय महिला जिसे चलने फिरने में सांस फूलने की शिकायत थी। कई अस्पतालों में उपचार कराने के बाद वह एम्स पहुंची, संस्थान में चिकित्सकीय परीक्षण में उसके दिल के तीन वाल बंद मिले। इनमें से दो वाल पूरी तरह से सिकुड़ गए थे जबकि तीसरे वाल में लीकेज था।
 डा.वालिया के अनुसार रोगी आर्थिक रूप से इस स्थिति में नहीं था कि बड़ी सर्जरी की जाए और बड़ी सर्जरी की स्थिति में धन अधिक खर्च होने के साथ ही 15 से 20 प्रतिशत तक जोखिम भी था। लिहाजा वैलून विधि से कम खर्च में सरल उपचार कर उसके दो बंद वाल सफलता पूर्वक खोल दिए गए हैं। जबकि तीसरा वाल जिसमें अन्य दो वाल की अपेक्षा कम सिकुड़न है, उसे दवाओं से दुरुस्त किया जाएगा।
  -दोबारा ऑपरेशन की स्थिति भी टाली 
-एम्स कॉर्डियो विभाग ने महिला रोगी का वैलून विधि से कम खर्च में उपचार करने के साथ ही दोबारा मेजर ऑपरेशन की स्थिति को भी टाल दिया। डा.वालिया के अनुसार मेजर ऑपरेशन में रोगी को बंद पड़े वाल की जगह तीन नकली वाल लगते, जिन्हें पांच से सात साल के अंतराल में दोबारा ऑपरेशन कर बदलना पड़ता है,जिससे रिस्क और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को खून पतला करने की दवा भी ताउम्र लगातार लेनी पड़ती।

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