संस्कृति और प्रकृति के माध्यम से भविष्य की रक्षा का अनूठा प्रयोग

भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध मजबूत करना

ऋषिकेश, 23 मार्च। विश्व में ख्याति प्राप्त परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के पवित्र परिसर में बाली के एक  उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पधारे हुये है। इंडोनेशिया, बाली से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने एकता की संस्कृति को स्थापित करने के लिये परमार्थ निकेतन में होने वाली दिव्य गंगा जी की आरती में सहभाग किया और इस दौरान अपनी परंपरा को जीवंत बनायें रखने के लिये मनमोहक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री इंद्र उदयन जी, संस्थापक अध्यक्ष आश्रम गांधी पुरी, बाली, इंडोनेशिया ने किया।
परमार्थ गंगा के दिव्य तट पर इंडोनेशिया, बाली से आये उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का दर्शन किया तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा, रूद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र प्राप्त कर सभी ने आशीर्वाद प्राप्त किया।
 इंडोनेशिया, बाली से आये उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने दो सप्ताह पूर्व परमार्थ निकेतन में अपनी यात्रा  के दौरान उन्होने एक पवित्र पद्मासन ’’कमल मुद्रा’’ की स्थापना की चर्चा स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से की थी। बाली में इस प्रकार का सुन्दर मन्दिर हैं, जहां पर भगवान उच्च आसन पर विराजमान हैं, यह अद्भुत मन्दिर है। यह मन्दिर बालिनी लोगों के लिये विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पद्मासन परमार्थ निकेतन के परिसर में स्थित होगा यह न केवल बाली और इंडोनेशिया के लोगों का भारत में स्वागत करेगा, बल्कि इंडोनेशिया और भारत के बीच 70 साल से अधिक पुुराने संबंधों को और मजबूत करेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की यह उत्कृष्ट पहल से दोनों राष्ट्रों के मध्य सांस्कृतिक और एकता के सम्बंध स्थापित होंगे, इस हेतु ही पद्मासन की स्थापना की विनम्रतापूर्वक पहल की गयी। इस खूबसूरत शुरूआत के प्रतीक के रूप में दूसरे प्रतिनिधि मंडल के पूरे समूह ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में दीप प्रज्जवलित किया साथ ही सभी ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की।
यह दोनों राष्ट्रों के बीच इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान की उत्कृष्ट शुरूआत है। भारत के माननीय अभूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी  जी ने 2003 में बाली, इंडोनेशिया का दौरा किया था तब वहां के लोगों ने उनसे प्रार्थना और उसके बाद 15 वर्ष पूर्व जब स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बाली की यात्रा की तदनन्तर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र तिवारी जी की यात्रा के दौरान वहां के गर्वनर ने दोनों से चर्चा की थी कि बाली के लोग गंगा जी में बहुत आस्था रखते है अतः अच्छा होगा कि गंगा जी के तट पर एक सुन्दर स्थल मिल सके जहां भगवान को स्थापित  किया जा सके। जिससे बाली के लोगों के दिल और दिमाग में एक बहुत ही विशेष आकर्षण बढ़ेगा तथा उत्तराखण्ड में सबका आना-जाना शुरू हो सकेगा और इससे सांस्कृतिक सम्बंध भी बढ़ेगे और पर्यटन भी।
पद्मासन की स्थापना का आज प्रथम चरण पूरा हुआ इस मन्दिर का प्रांगण  विधिवत उद्घाटन अप्रैल में सम्पन्न होगा। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने विचार संाझा करते हुये कहा कि ’हमेशा से हमारा मूल मंत्र मिलन, अभिनन्दन और सभी का सम्मान करना है। ऋषिकेश, भारत में पद्मासन की स्थापना इस मंत्र की शुरूआत है। भारत और इंडोनेशिया दो शरीरों की तरह हैं लेकिन आत्मा एक है। हम बिल्कुल अलग नहीं हैं और हमारे संबंध को गहरा करने के लिये यह एक शानदार शुरूआत है। मैं अक्सर यह कहा करता हूँ कि भारत भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह शान्ति की भूमि है और शान्ति प्रिय देश है। भारत ने हमेशा अन्य देशों के साथ शान्तिपूर्ण संबंध बनाये रखने के लिये काम किया है। इसलिये इस खूबसूरत सांस्कृतिक आदान-प्रदान से एक साथ आने वाले दोनों देश, दुनिया में अधिक सामंजस्य, प्रेम और शान्ति का शक्तिशाली प्रतीक बनेंगे।
श्री इंद्र उदयन जी ने कहा कि ’’पूज्य स्वामी जी महाराज ने इसकी पहल 15 साल पहले की थी । यह पहल विभिन्न समुदाय के लोगों को एक साथ लाने का उत्कृष्ट माध्यम है। उन्होने इसके लिये स्वामी जी महाराज के नेतृत्व करने हेतु धन्यवाद दिया और कहा कि यह दिव्य इच्छा सफल और साकार हो रही हैं। स्वामी जी महाराज का हृदय बहुत दयालु है जब हमने उन्हे पद्मासन की स्थापना के लिये जगह मांगी तो उन्होने परमार्थ निकेतन आश्रम के भव्य और पवित्र स्थान के भीतर तुरंत जगह प्रदान की। हमारे अनुरोध को स्वीकार करते हुये और अगले दिन काम शुरू हो गया। उन्होने कहा कि बाली, इंडोनेशिया के लोग गंगा जी के तट पर आना प्रसंद करते हैं। अब हमारी बहनों और भाईयों के पास भारत यात्रा करने का एक और दिव्य और पवित्र कारण होगा।
इसका आधिकारिक उद्घाटन बाली के माननीय राज्यपाल और अन्य गणमान्य लोगों के साथ अपै्रल में होगा, जब बाली के कलाकार और अधिक बहनें और भाई हमारे साथ माँ गंगा के तट पर यहां शामिल होंगे।
पद्मासन बाली का एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। यह बाली के हिंदू लोगों के लिये ’’इडा संग ह्यंग विधी वासा’’ भगवान की पूजा करने के लिये एक मंदिर है। पद्मासन स्थूल जगत या भुआना अगुंग ब्रह्माडं का प्रतीक और चित्र है। इंडोनेशिया के चारों ओर कई इमारतों में पद्मासन पाया जा सकता है। पद्मासन, कावी भाषा (पुराने जावानीस) से आया यह दो शब्दों से बना है, पद्म का अर्थ है कमल का फूल या केन्द्र और आसन का अर्थ है सिंहासन। पद्मासन का अर्थ ब्रह्माण्ड की छवि जो इडा सांग हयांग विधी वासा का स्थान है।पद्मासन का मुख्य कार्य सर्वशक्तिमान ईश्वर की पूजा करने का स्थान है। पद्मासन पर अंकित चिन्ह प्राकृतिक स्तरों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हे हिन्दू लोग ट्राई लोका मानते हैं। त्रिलोक में भू लोक अर्थात पृथ्वी, भुव लोक (वायुमंडल) और स्व लोक अर्थात स्वर्ग शामिल हैं। इस प्रतीक को बेदावांग नाला (हिंदू पौराणिक कथाओं में बड़ा कछुआ) से अंताबोगा और बासुकी (दो ड्रैग) के साथ देखा जा सकता है।

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