ऋषिकेश,। मायाकुंड किस्सेज स्थित भगवान गिरी आश्रम में भगवान गिरी महाराज का 33 वा निर्वाण उत्सव समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर आश्रम में आयोजित बाबा भूपेंद्र गिरी की अध्यक्षता में संत समारोह के दौरान संतों ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए कहा की सनातन धर्म में गुरु शिष्य की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। जिसके कारण आज भारत में ही गुरुओं के प्रति शिष्यों द्वारा की जा रही सम्मान की परंपरा चली आ रही है। संतो ने कहा कि आज गुरु के प्रति जो सम्मान का भाव दिखाई दे रहा है। वह भारतीय परंपरा ही है ।संतों का कहना था कि आज जहां गौ ,गंगा, गायत्री को जिस प्रकार भारत में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है ।वह गो गंगा गायत्री के प्रति लोगों का समर्पित भाव ही है ।इसलिए गुरु बनाने से पूर्व भी शिष्य को भी ध्यान रखना चाहिए , कि जिसे वह अपना गुरु बना रहे हैं। वह किस संस्कृति में अपना जीवन यापन कर रहा है, क्योंकि गुरु की तपस्या किसी से छुपी नहीं होती, तभी कहा गया है कि गुरु बनाओ जान कर, पानी पियो छान कर। जिससे गुरु के प्रति सम्मान का भाव बना रहेगा इस अवसर पर महंत प्रदीप दास, राम कृपालु महाराज, राजेंद्र गिरि, मंहत विनय सारस्वत, गोविंद दास , मनोहर , सहित हजारों संतो ने संत समागम मे प्रतिभाग किया ।
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भगवान गिरी का 33वां निर्वाण उत्सव धूमधाम से मनाया, गुरु के प्रति शिष्य का समर्पित भाव होना चाहिए

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