ऋषिकेश। बीते कई दिनों से प्रदर्शनकारी एम्स प्रशासन पर अनैतिक दबाव बनाते हुए अपनी अनैतिक व नियम विरुद्ध मांगों को मनवाने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं, जो कि वर्तमान नियमों के अनुरूप असंभव है। इस संदर्भ में कुछ स्थानीय नेताओं का रवैया भी अवांछनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण रहा है, जो कि नियुक्ति संबंधी नियमों की जानकारी होते हुए भी अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है l प्रदर्शनकारियों व उनके सहयोगियों द्वारा उक्त मामले को निरंतर तूल देने का प्रयास किया जा रहा है जो कि तथ्यों से परे है l मीडिया में लगातार गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी किया जाना इसका उदाहरण है l मीडिया में विभिन्न तरह की तथ्यहीन एवं भ्रामक बातों को निरंतर फैलाया जा रहा है। इसका मकसद जनसामान्य के बीच एम्स की छवि को धूमिल करना व आम जनता को मिल रही चिकित्सकीय सेवाओं को दुष्प्रभाव डालना है l इसी संदर्भ में प्रदर्शनकारियों द्वारा यह कहा जाना कि एम्स निदेशक ने नगर की मेयर के खिलाफ कोई टिप्पणी की है, बेबुनियाद एवं सर्वथा गलत है l जबकि एम्स निदेशक ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए बीती 15 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करके, मरीजों को मिलने वाली चिकित्सकीय सेवाओं को प्रभावित करने हेतु अपने एक साथी को एम्स की छत पर चढ़ा कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने और एम्स प्रशासन पर अनैतिक एवं गैरकानूनी कृत्य का हवाला देते हुए बाज आने के लिए कहा था, एवं ऐसा कृत्य दोबारा करने की स्थिति में कानून के अनुरूप कार्रवाई की बात कही थी l एम्स प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता संस्थान में उत्तराखंड के दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों एवं खासतौर से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों हेतु चिकित्सकीय सेवाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने की है,लिहाजा उक्त लोकहित के कार्य में किसी को भी अवरोध उत्पन्न करने नहीं दिया जाएगा l एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया् है कि माननीय मेयर के सम्मान के विपरीत ऐसा कोई भी व्यक्तव्य नहीं दिया गया है,लिहाजा प्रदर्शनकारियों द्वारा उक्त बयान को गलत ढंग से पेश कर इस तरह से भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है ।


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