देहरादून I मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस लूटकांड में जेल में बंद कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा और तीनों पुलिसकर्मियों की जमानत अर्जी सुनवाई के बाद नामंजूर कर दी है। आरोपी अब जनपद न्यायाधीश की कोर्ट में जमानत अर्जी लगाने की तैयारी में हैं।
गत चार अप्रैल की रात गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय रौतेला की गाड़ी में सवार होकर पुलिसकर्मियाें ने प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार से आचार संहिता की आड़ में बैग छीन लिया था। जिसमें मोटी रकम बताई जा रही है।
मामला मीडिया में छाने के बाद एसटीएफ जांच शुरू हुई थी। जिसमें एसटीएफ ने पूछताछ के बाद आरोपी कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा, निलंबित दरोगा दिनेश नेगी, सिपाही हिमांशु उपाध्याय और मनोज अधिकारी को लूट और अपहरण की धारा में जेल भेज दिया था।
बृहस्पतिवार को आरोपियों के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। एसटीएफ की रिपोर्ट आने के बाद शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई।
जिसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपों को निराधार बताया। लूट की धारा में गलत ढंग से चालान किया गया है। पहले तो यह साफ नहीं है कि कितनी धनराशि की लूट हुई और दूसरा किसी तरह की बरामदगी भी नहीं है। इनका किसी तरह का आपराधिक इतिहास भी नहीं है। ऐसे में जमानत दी जानी चाहिए।
सरकारी वकील ने यह कहकर विरोध किया कि यह धारा जमानती नहीं है। जो भी कार्रवाई की गई, वो साक्ष्य के अनुरूप है। सीजेएम ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कांग्रेस अनुपम शर्मा और तीनों पुलिसकर्मियाें की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। सीजेएम कोर्ट से जमानत न मिलने पर आरोपियों की ओर से अब जनपद न्यायाधीश की कोर्ट में जमानत अर्जी देने की तैयारी की जा रही है।
एसटीएफ को मिले नए अहम सुराग
पुलिस लूटकांड की जांच में जुटी एसटीएफ को नए अहम सुराग मिले हैं, जिन पर काम चल रहा है। एसटीएफ ने पुलिस अधिकारियों से बात में इस तरह के संकेत दिए हैं। कहा है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन कामयाबी की उम्मीदें काफी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में एसटीएफ कई अन्य लोगाें से भी पूछताछ कर सकती है।


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