ऋषिकेश,8मई। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गुप्ता ने  ऋषिकेश क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भी ना हटाए जाने पर पुनः उच्च न्यायालय में संबंधित विभागों के विरुद्ध दस्तक दिये जाने की बात कही है। सोमवार को नगर निगम के सभागार में आयोजित पत्रकारो   से बातचीत करते हुए आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गुप्ता   ने  कहां कि उन्हें नगर पालिका सहित सभी विभागों द्वारा दो हजार से अधिक लोगों के अतिक्रमण की सूची आरटीआई  के अंतर्गत मांगी गई  सूचना में दी गई थी। जिसके बाद  उनके द्वारा 21 अप्रैल 2010 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका ऋषिकेश में  सरकारी भूमि पर  अवैध कब्जे व अवैध निर्माण करने हेतु दायर की थी ।जिस पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा 24 अगस्त 2018 को निर्णय दिया गया था। कि ऋषिकेश में सरकारी भूमि फुटपाथ को अतिक्रमण से दो सफ्ताह मे मुक्त कराया जाए ।तथा अवैध रूप से मानचित्र स्वीकृत कराए गए जो मानचित्र से अलग है, को भी सील किया जाए ।जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2018 को सात विभागों को पक्षकार भी बनाए थे जिसमें(  मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन ,आयुक्त गढ़वाल मंडल पौड़ी, जिला अधिकारी देहरादून ,सार्वजनिक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड , सार्वजनिक निर्माण विभाग ,खंड ऋषिकेश हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के साथ नगर निगम) को भी अवगत करवा दिया था ।उसके बाद भी उनके द्वारा 29 अप्रैल 2019 को एक पत्र के माध्यम से संबंधित सभी पक्षकारों को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए अवगत कराया गया ।उसके बावजूद भी ऋषिकेश क्षेत्र  की तमाम गलियों बाजारों में संबंधित विभागों द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई ।जबकि उच्च न्यायालय ने दो सफ्ताह के अंन्दर अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिये थे। जिससे ऋषिकेश क्षेत्र की  सौंदर्यता तो खराब हो ही रही है ।साथ ही  यातायात भी अतिक्रमण के कारियों के कारण अवरुद्ध हो रहा है ।जिससे नगरवासियों सहित देश विदेश से आने वाले यात्रियों को भी घंटों तक जाम में फंसा रहना पड़ता है। जिससे उनका समय भी बर्बाद हो रहा है। अनिल गुप्ता ने कहा कि यदि जल्द ही  संबंधित विभागों द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया, तो वह उत्तराखंड न्यायालय के आदेश की अवमानना को लेकर न्यायालय का दरवाजा पुनः खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी जनहित याचिका के पक्ष मे शहर मे हो रहे अतिक्रमण के विरोध मेंं होने के कारण उनके साथ खड़े है। जोकि शासन प्रशासन का भी सहयोग देने के लिए तैयार हैं लेकिन कुछ तथाकथित व्यापारी नेता शासन प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं ।

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