ऋषिकेश,30जून (आज का आदित्य)। संत समिति ऋषिकेश भानु पूरा पीठ के निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के ब्रह्मलीन होने पर रविवार को जगन्नाथ आश्रम में आयोजित बैठक के दौरान उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी मनीराम मार्ग पर स्थित जगन्नाथ आश्रम में  संत समिति के अध्यक्ष  महंत विनय सारस्वत  की अध्यक्षता  में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान उत्तराखंड पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णाचार्य ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए जाने के बाद कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी  ने  शंकराचार्य की पदवी संभालने के बाद अपने आप को  मुख्य वक्ता  के साथ उच्च कोटि के संतो की  श्रंखला मैं भी अपना स्थान बना कर भारतीय संस्कृति की धर्म ध्वजा को धरा कर सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया उन्होंने राष्ट्रीय धर्म को निभाते हुए भारत माता मंदिर के निर्माण का कार्य किया वही जगन्नाथ आश्रम सेवक मंडल के अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि दिवंगत स्वामी सत्य मित्र की नेमीशरण में शिक्षा के बाद पूरा जीवन अपने अध्ययन का गीता आश्रम के संस्थापक वेदव्यास के चरणों में बैठकर बिताया  कैलाश आश्रम में उन्होंने वेदों का अध्ययन किया इसी के साथ उन्होंने ऋषिकेश की गलियों में भिक्षाटन भी किया । इस अवसर पर कबीर चौरा आश्रम के महंत प्रदीप दास ने स्वामी सत्यमित्रानंद के जीवन पर प्रमुखता से विचार व्यक्त किए इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में जगन्नाथ आश्रम के लोकेश दास, रामेश्वर गिरी ,पूर्णानंद, विवेकानंद ,इंदर गिरी , केवल आनंद ,स्वामी अखंडानंद, महंत कपिल मुनि, बलवीर सिंह , राजेंद्र दास , रविंद्र सिंह, प्रदीप दास, हरिदास ,रामानंद गिरी ,राकेश आनंद सरस्वती , हरी नारायण आचार्य नगर पार्षद सोनू प्रभाकर ,अमरदीप जोशी ,गोवर्धन चावला ,रजनी सेठी ,मनोज कालरा, कमलेश गुप्ता सहित अनेकों संतों ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित  किये।

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