परमार्थ गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने गंगा मंे लगायी आस्था की डुबकी
पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, संत श्री मुरलीधर जी, स्वामी ज्योतिर्मयानन्द जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, स्वामी सनातन तीर्थ जी, स्वामी केशवानन्द जी महाराज, साध्वी आभा सरस्वती जी, दिल्ली से आये प्रख्यात लेखक डाॅ नरेन्द्र कुमार एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने माँ गंगा जी का 108 कमल के पुष्प अर्पित कर किया पूजन
विश्व की पहली नदी है गंगा जिसके तट पर सूर्य अस्त के साथ जय गंगे माता का स्वर गूंजने लगता है वास्तव में यह अद्भुुत है
भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरूदण्ड और भारतीय आध्यात्म का सार है गंगा
गंगा जल औषधि नहीं बल्कि अमृत है-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 12 जून। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा तट पर स्वच्छता अभियान चलाया। तत्पश्चात पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, कथाकार संत श्री मुरलीधर जी, स्वामी ज्योतिर्मयानन्द जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, स्वामी सनातन तीर्थ जी, स्वामी केशवानन्द जी महाराज, साध्वी आभा सरस्वती जी, स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी, स्वामी शांतानन्द जी, स्वामी सेवानन्द जी, सुश्री गंगानन्दिनी त्रिपाठी जी, आचार्य संदीप शास्त्री जी, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों, आचार्यों एवं अन्य पूज्य संतों ने माँ गंगा जी को 108 कमल के पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजन किया।
 दिल्ली से आये प्रख्यात लेखक एवं विद्वान डाॅ नरेन्द्र कुमार जी गंगा दशहरा के अवसर पर विशेष रूप से परमार्थ निकेतन स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का आशीर्वाद लेने पहुंचे। उन्होने मानस कथा एवं माँ गंगा के विशेष पूजन में सहभाग किया। गंगा जी के अवतरण दिवस पर आज साध्वी भगवती जी द्वारा रचित एवं श्री नरेन्द्र जी द्वारा संकलित पुस्तक ’’मदर गंगा द होली रिवर’’ का विमोचन किया गया। इसका प्रकाशन हर आनन्द प्रकाशन द्वारा किया गया। इस अवसर पर हर आनन्द प्रकाशन के निदेशक श्री आशीष गोसाई जी उपस्थित थे।
 मानस कथा श्रवण करने आये श्रद्धालुओं ने सुश्री गंगानन्दिनी त्रिपाठी जी के मार्गदर्शन में योग किया फिर सभी ने गंगा स्नान, ध्यान और हवन में भाग लिया।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज माँ गंगा के अवतरण दिवस पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डबकी लगायी  और  आचमन किया होगा परन्तु यह केवल एक डुबकी या एक घूट आचमन नहीं है बल्कि यह तो आत्ममंथन की डुबकी है। यहां से निश्चय करके जाये कि जीवन में भरे क्रोध, अहंकार, ईष्र्या रूपी विष और पर्यावरण में भरे प्रदूषण रूपी विष को समाप्त करेंगे। अपने जीवन और अपने पर्यावरण को अमृत से भर दे।
 स्वामी जी ने कहा कि गंगा के जल मंे बैक्टीरियोफेज होता है साथ ही जल में कई वर्षो से जपे गये मंत्रों और प्रार्थना की जो शक्ति है वह अद्भुत है। माँ गंगा के दर्शन मात्र से ही मन को शान्ति मिलती है। विश्व की वह पहली नदी है जिसके तटों पर अस्त होते सूर्य के साथ जय गंगे माता का स्वर गूंजने लगता है। गंगा जल औषधि नहीं बल्कि अमृत के समान है।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि माँ गंगा ने पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों को जन्म तो नहीं दिया परन्तु जीवन अवश्य दिया है। भारत की राष्ट्रीय नदी गंगा युगोेें युगों से मानवीय चेतना का संचार कर रही है। वेदों की ऋचाओं में है गंगा; साहित्यकारों के साहित्य में है; कवियों की कविताओं में; ऋषियों की तपस्या में और तीनों छन्दों में गंगा समाहित है। साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरूदण्ड और भारतीय आध्यात्म का सार है गंगा। माँ गंगा के बारे में जितना कहा और लिखा जाये वह बहुत कम है। आईये अपनी सोच और अपने व्यवहार में परिवर्तन लाये और अपनी गंगा, अपना पर्यावरण और अपनी धरा को स्वच्छ बनायेेेे।
 राम कथा में गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर संत श्री मुरलीधर जी महाराज मां गंगा के अवतरण और उस के महत्व को भजन के माध्यम से सारगर्भित रुप मैं भक्तों के समक्ष रखा, उन्होंने बताया कि मां गंगा में स्नान करते समय अटखेलियां करना या पति पत्नी के साथ स्नान करते समय मस्ती करना मां गंगा की निर्मल  मर्यादा के अनुरुप नहीं है पति पत्नी को हाथ पकड़ कर साथ में डुबकी लगानी चाहिए और अपने सुखी दांपत्य जीवन की कामना करनी चाहिए और जन्म जन्म में भी पति-पत्नी का साथ मिले, लेकिन गंगा में नहाते समय एक दूसरे पर पानी उछालना, मस्ती करना, अठखेलियां करना उचित नहीं है गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए गंगा में दीपक, माला, कपड़े, प्लास्टिक जैसा कोई पदार्थ नहीं डाले और  मन में संकल्प लें हम पूरे पर्यावरण को प्लास्टिक रहित और पौधे लगाकर हरित और निर्मल  बनाएंगे।
 प्रसिद्ध लेखक श्री नरेन्द्र जी ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी ने भारतीय संस्कृति और हिन्दु धर्म को विश्व के अनेक देशोें तक पहुचांया है वास्तव में यह विलक्षण कार्य है।
 जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि गंगा दशहरा के दिन माँ गंगा के तट पर रहना सचमुच भाग्यशाली अवसर है। आज से 23 वर्ष पूर्व मैं पीएचडी करने के पश्चात भारत भ्रमण के लिये आयी थी तब मुझे गंगा और हिमालय के बारे में कुछ पता नहीं था परन्तु यह माँ गंगा की कृपा और स्वामी जी का आशीर्वाद ही था कि मैं फिर भारत की ही होकर रह गयी। उन्होने कहा कि जब मैने माँ गंगा के दर्शन किये तब से मेरा पूरा जीवन माँ गंगा का हो गया। जहां गंगा जी है वहां सब कुछ है। साध्वी जी ने कहा कि भौतिक वस्तुओं में जीवन की मस्ती और शान्ति नहीं है वास्तविक शान्ति तो गंगा जी के तट पर है।
  स्वामी जी महाराज ने आज गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प कराया। उन्होने कहा कि गंगा जीवनदायिनी है उसमें अपने पुराने कपडे़, पुरानी पुस्तकंे, भगवान के चित्र, फुल, माला और अन्य पूजन सामग्री विसर्जित करके गंगा जल प्रदूषित न करे। उन्होने कहा कि आज किया संकल्प अलौकिक और दिव्य संकल्प होगा आप सब अपनी-अपनी गलियों को गोद ले इससे गलियां का स्वरूप बदलेगा। गलियां बदलेगी तो गांव बदलेंगे, गांव बदलेगा तो राष्ट्र बदलेगा। यह संकल्प माँ गंगा को समर्पित करे आज के दिन यही उपहार है हम सभी की ओर से माँ गंगा के लिये।

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