देहरादून: अल्मोड़ा में कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति रद और पुराने जिलाध्यक्ष की बहाली के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल की नाराजगी फौरी तौर पर दूर भले ही हो गई, लेकिन ये सवाल अब भी सियासी फिजा में तैर रहा है कि प्रदेश में पार्टी के भीतर गुटबाजी आगे भी जारी रहेगी, या इसे थामा जा सकेगा।
सिर्फ कुंजवाल ही नहीं, उनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद महेंद्र सिंह माहरा व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट भी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करने से नहीं चूके हैं।
अगले वर्ष लोकसभा चुनाव और चालू वर्ष में नगर निकाय चुनाव को देखते हुए कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटीय खींचतान तेज हो गई है। इसे आगामी चुनावों की चुनौती के मद्देनजर पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिशों के रूप में भी देखा जा रहा है। 
प्रदेश में विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेल चुकी कांग्रेस के सामने निकाय और लोकसभा चुनाव में बेहतर और दमदार प्रदर्शन का दबाव है। इस चुनौती को देखते हुए ही पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सबको साथ चलने की हिदायत दे चुका है।

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