उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां अरबों रुपये की हैं लेकिन बोर्ड में काम करने वाले कर्मचारी सिर्फ चार या पांच ही हैं. 17 साल में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड को मुकम्मल स्टाफ तक मुहैय्या नहीं हो पाया है.

वक्स बोर्ड के पास अरबों रुपये की अपनी संपत्ति की देखरेख, हिसाब रखने के लिए सिर्फ एक सीईओ हैं, एक इंस्पेक्टर और दो बाबू. उत्तराखंड बनने के 17 साल के दौरान कई सरकारें आईं और चली भी गईं लेकिन वक्फ बोर्ड की तरफ किसी का ध्यान तक नहीं गया.

उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में जहां वक्फ बोर्ड में सैकड़ों कर्मचारियों का स्टाफ काम करता है वहीं उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में स्टाफ के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है.

बोर्ड में जिन सीईओ की तैनाती है उनके पास दूसरे विभागों की ज़िम्मेदारियां भी हैं इसलिए यह भी कुछ ही वक्त बोर्ड को दे पाते हैं.  इसके अलावा एक ऑडिटर कम इंस्पेक्टर और दो बाबू ही वक्फ़ बोर्ड की ज़िम्मेदारी उठाए हैं.
बोर्ड के सीईओ अब्दुल अलीम अंसारी कहते भी हैं कि स्टाफ की कमी से जूझ रहे बोर्ड के काम पर बुरा असर पड़ रहा है.

अलीम बताते हैं कि बोर्ड ने स्टाफ की कमी का ज़िक्र पुरानी सभी सरकारों के सामने रखा था लेकिन कभी भी उसका कोई माकूल जवाब महकमे को नहीं मिला. वक्फ बोर्ड में काम के सिलसिले में दूर-दूर से आने वाले लोग भी अफ़सर न मिलने पर परेशान होकर वापिस लौट जाते हैं.

 

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