उत्तराखंड में ऊर्जा विभाग घपले और घोटालों का विभाग बनकर रह गया है. कई बार ऊर्जा विभाग में एक से बढ़कर एक घोटालों को अंजाम दिया जा चुका है. एक बार फिर से ऊर्जा विभाग में एक और घोटाले की बू आ रही है.

प्रदेश को रोशन करने की जिम्मेदारी जिस विभाग की है, वही विभाग अपने काले करनामों से उत्तराखंड को भ्रष्टाचार के ऐसे अंधेरे में धकेले जा रहा है. ताजा मामले में विभाग अपना खजाना एक खास कंपनी पर लुटा रही है. यूपीसीएल से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार ऊर्जा विभाग ने पावर हाउस में लगने वाली रिले को बाजार भाव से तकरीबन डेढ़ गुनी कीमत पर एक खास कंपनी से खरीदे हैं. यूपीसीएल के दस्तावेजों से और भी हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं.

ट्रिप रिले की क़ीमत और कोटेशन के लिए खरीदारी में कई खामियां सामने आई है. कोटेशन के लिए आशीदा कंपनी द्वारा बनी ट्रिप रिले को चुना और उससे कोटेशन मांगे गए. सबसे पहला सवाल कि यूपीसीएल ने सिर्फ एक ही कंपनी को क्यों चुना गया.

बाजार भाव से ज्यादा का किया भुगतान
ट्रिप रिले की बाजार में कीमत और उर्जा विभाग को भेजी गई कीमत में जमीन आसमान का फर्क है. जिससे मामले में घोटाले की आंशका ज़ाहिर होती है. कम्पनी मार्केट रेट पर ट्रिप रिले को 23,500 रुपए में बेचती है, जबकि वहीं ट्रिप रिले उर्जा विभाग को कम्पनी ने 36,500 रुपए में बेचा है. एक तरफ मास्टर ट्रिप रिले का मार्केट रेट जहां 3,800 रुपए है, वहीं उर्जा विभाग को कम्पनी ने यहीं मास्टर ट्रिप रिले 16,500 रुपए में बेची है. रिले टेस्टिंग और लगाने की कीमत कम्पनी बाजार से 4000 रुपए लेती है, वहीं ऊर्जा विभाग से 10,000 रुपए वसूले हैं.

इतना ही जब पूरानी ट्रिप को उतार कर नई ट्रिप लगाई जाती है तो सिर्फ नई ट्रिप को लगाने के पैसा लिया जाता है. विभाग ने तो हद कर दी और उतारने और लगाने दोनों  का भुगतान कंपनी को किया गया है. मार्केट रेट पर कंपनी ट्रिप लगाने के लिए जहां 2500 रुपये लेती है वहीं कंपनी को विभाग द्वारा 7000 रुपये की दर से  भुगतान किया है.

मामला सामने आने पर यूपीसीएल के एमडी वीसीके मिश्रा ने कहा कि विभाग में हुई गड़बड़ी की जांच करने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे. कंपनी के एक जैसे रिले के सरकारी भाव और मार्केट भाव में अंतर से साफ जाहिर होता है कि ट्रिप रिले की खरीदारी में विभाग और कंपनी की कोई सांठ-गांठ है.

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