मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की वजह से एक के बाद एक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. बीमा कंपनी के साथ कांट्रेक्ट रिन्यू न हो पाने की वजह से जब एमएसबीवाई कार्ड बंद हो गए और अस्पतालों में कार्डधारकों को इलाज से मना किया जाने लगा. चारों तरफ़ आलोचना के बाद मुख्यमंत्री ने रविवार को ऐलान किया कि ऐसे सभी कार्डधारकों का अस्पताल मुफ़्त इलाज करेंगे. लेकिन एक दिन बाद ही यह घोषणा खोखली निकली.
राज्य के 12 लाख से अधिक कार्डधारकों को मुख्यमंत्री के ऐलान से बड़ी राहत मिली होगी लेकिन इसके भरोसे अस्पताल पहुंचे ऐसे लोगों को टका सा जवाब मिल गया. प्राइवेट अस्पताल तो छोड़ें राजधानी के दून और कोरोनेशन अस्पताल में भी एमएसबीवाई कार्ड धारकों को निशुल्क इलाज नहीं मिल पाया.
उत्तरकाशी के पुरोला से दून अस्पताल पहुंचे गजेंद्र रावत को एमएसबीवाई पर इलाज दिए जाने से इनकार कर दिया गया. अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि यह कार्ड अब वैलिड नहीं है.
देहरादून निवासी आसिफ़ अहमद माइग्रेन की समस्या का इलाज करवाने दून अस्पताल पहुंचे थे लेकिन उनका भी एमएसबीवाई कार्ड नहीं चला. निराश आसिफ़ कहते हैं कि लगता है कि इसी माइग्रेन के साथ जीना होगा.
इन्हीं की तरह दून अस्पताल में बहुत से लोग एमएसबीवाई कार्ड और मुख्यमंत्री की घोषणा को लेकर परेशान नज़र आए और सवाल पूछते दिखे.
इस बारे में सवाल पूछे जाने पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक केके टम्टा ने बिना लिखित आदेश के मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल कर पाने में असमर्थता जताई. उनका कहना है कि सरकार गाइडलान्स तय कर दे कि किस मद के तहत निशुल्क इलाज का खर्च डाला जाएगा और लिखित में यह आदेश दिए जाएं.
हालांकि टम्टा बताते हैं कि दून अस्पताल में डेस्टीट्यूड फंड बनाया गया है (अस्पताल स्टाफ़ ने स्वेच्छा से इसमें पैसे दिए हैं) जिससे कुछ मरीज़ों को निशुक्ल इलाज दिया जा रहा है. लेकिन यह बहुत सीमित राशि है.
इस स्थिति से यह समझा जा सकता है कि एमएसबीवाई कार्ड का अनुबंध क्यों और कैसे ख़त्म हो गया होगा. मुख्यमंत्री ने बयान दे दिया और मान लिया कि उनके आदेश का पालन हो जाएगा लेकिन सरकारी मशीनरी ने ज़रूरी क़ाग़ज़ी कार्रवाई नहीं की और न तो एमएसबीवाई कार्ड रिन्यू हुए, न ही अस्पतालों में मरीज़ों को इलाज मिला.


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