पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव के प्रचार में डबल इंजन की सरकार के मायने कुछ इस तरह समझाए थे कि उत्तराखंड की जनता ने बीजेपी की झोली में 57 विधायक चुनकर डाल दिए लेकिन राज्य के एक लाख से अधिक बच्चों का भविष्य इस डबल इंजन के नीचे कुचला जा सकता है.
दरअसल केंद्र सरकार ने प्रदेश का आरटीई का बजट पिछले दो सालों से रोका हुआ है जिसकी वजह से प्रदेश सरकार दो सालों से 3,009 स्कूलों में पढ़ने वाले एक लाख 5 हज़ार छात्रों की फीस नहीं दी जा सकी है.
सर्व शिक्षा अभियान के अपर परियोजना निदेशक मुकुल सती बताते हैं कि केंद्र सरकार से प्रदेश का आरटीई का 210 करोड़ रुपये का बजट रुक गया है. इसकी वजह से स्कूलों को फ़ीस जारी नहीं की गई तो छात्रों को ड्रेस, मिड डे मील के लिए जो 2100 रुपये मिलने थे वह भी दो साल से नहीं मिल पाए हैं.
सती के अनुसार प्रदेश सरकार के पास इताना बजट नहीं है कि वह स्कूलों फीस दे पाए. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा और कहीं प्राइवेट स्कूलों के साथ सरकार का यह अनुबंध भी इस लापरवाही के चलते एमएसबीवाई की तरह अचानक ख़त्म तो नहीं हो जाएगा.
प्राइवेट स्कूल मालिक आरटीई के तहत एडमिशन देने से अभी तो इनकार नहीं कर रहे हैं लेकिन दबी आवज में कह रहे है कि ऐसा कब तक चलेगा और स्कूल फ़ीस का इंतज़ार करते रहेंगे.
मुकल सती के अऩुसार बजट रिलीज़ करने को लेकर शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय कुछ दिन पहले ही दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिल चुके हैं और उम्मीद है कि जल्द ही केंद्र सरकार बजट रिलीज़ कर देगी और यह समस्या दूर हो जाएगी.


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