रुद्रपुर। पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह कानूनी दांव पेंच में अपनी पहली लड़ाई हार गए। अंततरू उन्हें एसएसपी दफ्तर में आत्म समर्पण करना पड़ा। जब एसआईटी ने उन्हें बयानों के लिए बुलाया था तो वह कानून की किताब लेकर अपने बयान दर्ज कराने आए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके द्वारा जो भी अभिनिर्णय पारित किए गए हैं वह नियमों के हिसाब से सही हैं। हालांकि एसआईटी ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाते हुए उनका नाम दर्ज मुकदमे में खोल दिया। जिस पर डीपी सिंह ने नैनीताल हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया। एसआईटी ने उनका स्टे खारिज कराने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद डीपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की, लेकिन एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दायर कर रखी थी। सुनवाई में उनकी एसएलपी खारिज कर दी गई। इसके बाद भी डीपी सिंह ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट में फिर एसएलपी दाखिल की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिल पाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पहले न्यायालय में हाजिर हों तभी उनकी एसएलपी पर सुनवाई होगी। यानि पूरी जांच के दौरान डीपी सिंह कानूनी दांव पेंच का सहारा लेते रहे, लेकिन कानूनी दांव पेंच में वह फिलहाल लड़ाई हार गए।


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