उत्तराखंड में एकबार फिर लोकायुक्त गठन का जिन्न बाहर आ गया है. विधानसभा सत्र आहुत होने से ये उम्मीदें और बढ़ गई हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि मौजूदा विधानसभा सत्र में सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है.
गैरसैंण विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होते ही लोकायुक्त गठन को लेकर फिर कयासबाजी शुरू हो गई है. विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने सशक्त लोकायुक्त देने का वादा किया था. सरकार आने पर विधानसभा के पटल पर विधेयक भी पेश कर दिया गया, लेकिन बाद में इसे प्रवर समिति को सौंप दिया गया.
प्रवर समिति की रिपोर्ट अब तक सदन के पटल पर नहीं रखी गई है. अब एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि लोकायुक्त पर कोई फैसला हो सकता है. लोकायुक्त के मामले पर कड़ा फैसला लेने वाले पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी की बेटी और मौजूदा विधायक ऋतु खंडूड़ी भी आस लगाये हैं कि सरकार मौजूदा सत्र में कोई फैसला लेगी.
विपक्ष भी इस मामले पर लगातार सरकार पर हमलावर रहा है, लेकिन लम्बी जद्दोजहद के बाद भी राज्य में लोकायुक्त का गठन नहीं हो सका है. हर महीने लाखों रुपये यहां तैनात कर्मचारियों पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन काम धेले भर का भी नही हो रहा. फिलहाल मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत कह रहे हैं कि विधानसभा सत्र तक इंतजार करिए.
दिसम्बर 2013 से उत्तराखंड में लोकायुक्त का पद खाली है, लेकिन यहां तैनात स्टाफ को हर महीने लाखों रुपये का वेतन दिया जा रहा है साथ ही वाहन और दफ्तर पर भी मोटी रकम खर्च हो रही है. सवाल ये है कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस पहल क्यों नहीं कर रही है. बहरहाल विधानसभा सत्र के मद्देनजर एक बार फिर उम्मीद जगी हैं कि शायद इस बार लोकायुक्त गठन पर कोई फैसला हो जाए.


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