उत्तराखण्ड की खूबसूरत वादियां, पहाड़ और झरने न केवल देवभूमि के सौन्दर्य को चार चांद लगाते हैं बल्कि राज्यवासियों की किस्मत को भी बुलन्द करते हैं. दरअसल पर्यटन राज्य की आय का मुख्य स्त्रोत है. ऐसे में उत्तराखण्ड में पर्यटन पर 17 सालों में कितना काम हुआ ये समझना भी ज़रूरी है.

देश में पर्यटन किसी भी राज्य के लिए एक सामान्य सेक्टर हो सकता है लेकिन उत्तराखण्ड के लिए ये रोजी रोटी से जुडा है. पर्यटन से ही राज्य के हज़ारों लोगों के घरों में चूल्हे जलते हैं और यही राज्य सरकार के खजाने को भरने में अहम योगदान देता है.

राज्य में धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, योगा टूरिज्म, हेल्थ टूरिज्म, ईको टूरिज्म और होम स्टे टूरिज्म जैसे कई तरह के तरीकों से पर्यटन को खींचने पर काम किया जा रहा है. मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत राज्य में 13 नए पर्यटक स्थल विकसित करने की बात कहते हैं.

पर्यटन की प्रदेश में अपार सम्भावनाएं हैं लेकिन यह भी सच है कि राज्य स्थापना के 17 सालों में इस पर काम नगण्य ही रहा है. राज्य की चार निर्वाचित सरकारों में से किसी ने भी अब तक पर्यटन के क्षेत्र में भूमिका बांधने के सिवाय कुछ नहीं किया.

हालांकि राजनीतिक घोषणा पत्रों में तो पार्टियों ने पर्यटन को खास तवज्जो दी लेकिन इतने साल बाद भी राज्य में किसी नए पर्यटक स्थल को पूरी तरह से विकसित नहीं किया जा सका. सरकारों ने पर्यटन को लेकर कई योजनाएं चलाईं लेकिन कोई भी ऐसी नहीं रही जिसे सही मायनों में सफल कहा जा सकता हो.

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने धार्मिक पर्यटन के लिए चार धामों के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों में भी सुविधाएं विकसित करने का दावा करते हैं. यही नहीं औली को विंटर स्पोर्ट्स के लिए तैयार करने की दिशा में काम करने की बात भी कही है.

सरकार के लिए राहत की बात यह रही कि इस साल चार धाम में 22 लाख, 55 हजार श्रदालु पहुंचे. खुद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने केदार और बद्रीनाथ पहुंचकर विश्व में इन स्थलों का सकारात्मक संदेश भी दिया है.

सतपाल महाराज के मुताबिक 2018 शुरुआत में ही औली में बड़े आयोजनों के लिए काम किया जा रहा है. इसके अलावा कई पर्यटन योजनाएं पलायन को रोकने और युवाओं को रोजगार देने के मकसद से भी बनाई जा रही है.

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