रुद्रपुर के एनएच 74 घोटाले के आरोपी डीपी सिंह अब पुलिस गिरफ्त में हैं. हालांकि उत्तराखण्ड पुलिस को करीब एक महीने तक छकाने के बाद गुरुवार को उन्होंने खुद अपनी मर्ज़ी और सहूलियत समर्पण किया.

गुरुवार की दोपहर ढाई बजे अपने वकीलों के दल बल के साथ निलम्बित एसडीएम डीपी सिंह एसएसपी डॉक्टर सदानन्द दाते के ऑफिस पहुंचे और अपने आप को पुलिस के हवाले किया.

पिछले लगभग एक महीने से उत्तराखण्ड की पुलिस डीपी सिंह की तलाश कर रही थी. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से डीपी सिंह को गिरफ्तारी से बचने के लिए अरेस्ट स्टे नहीं मिल पाया था. एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में उनकी रिवीजन पिटीशन भी खारिज कर दी गयी थी.

अब भूमि घोटाले की जांच के लिए बनी एसआईटी की टीम डीपी सिंह से पूछताछ कर रही है.
एसआईटी में जांच अधिकारी डिप्टी एसपी स्वतंत्र सिंह ने न्यूज 18 को बताया कि पूछताछ के बाद डीपी सिंह को गिरफ्तार किया जाएगा. उसके बाद कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा.

दूसरी तरफ डीपी सिंह के वकील भूपेन्द्र सिंह ने न्यूज़ 18 से कहा कि पुलिस का डीपी सिंह को फ़रार बताने का आरोप निराधार है. डीपी सिंह लगातार कोर्ट की शरण में थे और वहां से राहत के लिए उन्होंने अर्जी दाखिल कर रखी थी.

यह पूछने पर कि अदालत में आरोपी ने समर्पण क्यों नहीं किया. वकील भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि डीपी सिंह फरार नहीं थे बल्कि वे अदालत की शरण में थे. जब अदालत से राहत नहीं मिली तो उन्होंने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया.

एनएच 74 घोटाले में अभी तक दर्जनभर लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. ये घोटाला गलत करीके से मुआवजा बांटने से जुड़ा है. रुद्रपुर की तरफ से जाने वाले एनएच 74 घोटाले में आरोप है कि जमीन की प्रकृति बदलकर अवैध तरीके से किसानों को ज्यादा मुआवजा दिया गया.

 

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