एनडीएमए ने उत्तराखंड के चमोली में अगले चौबीस घंटों में हिमस्खलन आने की चेतावनी जारी की है. चमोली के अलावा 9 और हिमालयी ज़िलों में हिमस्खलन आने की चेतावनी करने के साथ ही हिमस्खलन संभावित ढलानों से लोगों को दूर रहने की सलाह दी है.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने बुधवार शाम पांच बजे से गुरुवार शाम बजे तक भूस्खलन आने की चेतावनी जारी की है.

एनडीएमए की ओर से एवेलॉंच बुलेटिन के अनुसार खतरे के स्तर के लिहाज से चमोली तीसरे पैमाने पर है जिसका अर्थ है कि परिस्थितियां असुरक्षित हैं. अधिकतर हिमस्खलन संभावित ढलानों (avalanche prone slope) से हिमस्खलन हो सकता है और मध्यम आकार में घाटी में पहुंच सकता है.
बुलेटिन में सलाह दी गई है कि ढलानों पर किसी तरह की गतिविधि न की जाए और यात्रा मार्ग सावधानी से तैयार किए जाएं. घाटी में भी गतिविधियां सावधानीपूर्वक की जाएं. हिमस्खलन के रास्तों पर और उनके आस-पास के रास्तों से असुरक्षित निवास स्थानों को खाली कर दिया जाए.

लेकिन चिंताजनक रूप से राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार विभाग (डीएमएमसी) इसकी तैयारियों को लेकर सोया हुआ दिख रहा है.

डीएमएमसी के निदेशक पीयूष रौतेला से न्यूज़ 18 ने इस चेतावनी और उसके बाद की जाने वाली तैयारियों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “ऐसा कोई अलर्ट जारी नहीं हुआ है. हमारे राज्य के लिए ऐसा कोई अलर्ट नहीं है”.

यह बात अब सर्वविदित है कि 2013 की केदारनाथ आपदा की पूर्व चेतावनी मौसम विभाग ने जारी की थी और तब भी आपदा प्रबंधन विभाग और सरकार सोई रही थी. डीएमएमसी निदेशक का यह रवैया साबित कर रहा है कि इस राज्य के अधिकारी ऐसी घटनाओं से कुछ सीखने को तैयार नहीं हैं.

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